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  1. कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है Kumar Vishwas Poem in Hindi

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है मैं तुझसे दूर कैसा हूँ,

तू मुझसे दूर कैसी है ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है

यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आँखों में आँसू हैं जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है समंदर पीर का अन्दर है,

लेकिन रो नही सकता यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना,

मगर सुन ले जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नहीं सकता भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो

हंगामा अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा

  1. फिर तेरी याद रही होगी Kumar Vishwas Poem in Hindi

फिर तेरी याद रही होगी फिर वो दीपक बुझा रही होगी फिर मिरे फेसबुक पे कर वो ख़ुद को बैनर बना रही होगी

अपने बेटे का चूम कर माथा मुझ को टीका लगा रही होगी फिर उसी ने उसे छुआ होगा फिर उसी से निभा रही होगी

जिस्म चादर सा बिछ गया होगा रूह सिलवट हटा रही होगी फिर से इक रात कट गई होगी फिर से इक रात रही होगी

  1. मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊँगा Kumar Vishwas Poem in Hindi

मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊँगा जागती रहना तुझे तुझ से चुरा ले जाऊँगा

हो के क़दमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा ख़ाक में मिल कर भी मैं खुशबू बचा ले जाऊँगा कौन सी शय

मुझ को पहुंचाएगी तेरे शहर तक ये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊँगा कोशिशें

मुझ को मिटाने की भले हों कामयाब मिटते मिटते भी मैं मिटने का मज़ा ले जाऊँगा शोहरतें,

जिन की वज्ह से दोस्त दुश्मन हो गए सब यहीं रह जाएँगी मैं साथ क्या ले जाऊँगा

  1. रंग दुनिया ने दिखाया है निराला देखूँ Kumar Vishwas Poem in Hindi

रंग दुनिया ने दिखाया है निराला देखूँ है अँधेरे में उजाला तो उजाला देखें आइना रख दे मिरे सामने आख़िर

मैं भी कैसा लगता है तिरा चाहने वाला देखूँ कल तलक वो जो मिरे सर की क़सम खाता था

आज सर उस ने मिरा कैसे उछाला देखें मुझ से माज़ी मिरा कल रात सिमट कर बोला किस तरह मैं

ने यहाँ ख़ुद को सँभाला देखूँ जिस के आँगन से खुले थे मिरे सारे रस्ते उस हवेली पे भला कैसे मैं ताला देखूँ

  1. रात और दिन का फ़ासला हूँ मैं Kumar Vishwas Poem in Hindi

रात और दिन का फ़ासला हूँ मैं ख़ुद से कब से नहीं मिला हूँ मैं ख़ुद भी शामिल नहीं सफ़र में पर लोग कहते हैं क़ाफ़िला हूँ

मैं मोहब्बत तिरी अदालत में एक शिकवा हूँ इक गिला हूँ मैं मिलते रहिए कि मिलते रहने से मिलते रहने का सिलसिला हूँ

मैं फूल हूँ जिंदगी के गुलशन का मौत की डाल पर खिला हूँ मैं

  1. सब तमन्नाएँ हों पूरी कोई ख्वाहिश भी रहे Kumar Vishwas Poem in Hindi

सब तमन्नाएँ हों पूरी कोई ख़्वाहिश भी रहे चाहता वो है मोहब्बत में नुमाइश भी रहे आसमाँ चूमे मिरे पँख तिरी रहमत से और

किसी पेड़ की डाली पे रिहाइश भी रहे उस ने सौंपा नहीं मुझ को मिरे हिस्से का वजूद उस की कोशिश है

कि मुझ से मिरी रंजिश भी रहे मुझ को मालूम है मेरा है वो मैं उसका हूँ उस की चाहत है कि रस्मों की ये बंदिश भी रहे

मौसमों से रहेंविश्वासके ऐसे रिश्ते कुछ अदावत भी रहे थोड़ी नवाज़िश भी रहे

  1. उनकी खैरख़बर नहीं मिलती Kumar Vishwas Poem in Hindi

उन की खैरख़बर नहीं मिलती हम को ही ख़ास कर नहीं मिलती

शायरी को नज़र नहीं मिलती मुझ को तू ही अगर नहीं मिलती रूह में

दिल में जिस्म में दुनिया ढूँढता हूँ मगर नहीं मिलती लोग कहते हैं

रूह बिकती है मैं जिधर हूँ उधर नहीं मिलती

  1. तुम्हें जीने में आसानी बहुत है Kumar Vishwas Poem in Hindi

तुम्हें जीने में आसानी बहुत है तुम्हारे खून में पानी बहुत है

कबूतर इश्क का उतरे तो कैसे तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

इरादा कर लिया गर खुदकुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है

ज़हर सूली ने गाली गोलियों ने हमारी ज़ात पहचानना बहुत है

तुम्हारे दिल की मनमानी मिरी जाँ हमारे दिल ने भी मानी बहुत है

  1. उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे Kumar Vishwas Poem in Hindi

उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे मेरी पलकों से फिसल जाता है

चेहरा तेरा ये मुसाफिर तो कोई और ठिकाना चाहे एक बनफूल था

इस शहर में वो भी रहा कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे जिंदगी

हसरतों के साज़ पे सहमासहमा वो तराना है जिसे दिल नहीं गाना चाहे

  1. ये ख़यालों की बदहवासी है Kumar Vishwas Poem in Hindi

ये ख़यालों की बदहवासी है या तेरे नाम की उदासी है

आइने के लिए तो पतली है एक काबा है एक काशी है

तुम ने हम को तबाह कर डाला बात होने को ये ज़रा सी है

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