If you searching for the best Poems in Hindi for Class 7 then you are in the right place. Here I’m sharing with you unique Poems in Hindi for Class 7 which is really amazing and interesting I’m sure you will like it and appreciate it. These emotional poems also encourage you in your life.

दर्द का रूख Poems in Hindi for Class 7

दुःख दर्द के जब मैं सोचूं किस्से, लगता सब है मेरे हिस्से अंतर आत्मा फिर ये बोली, जिसने मेरी अंखियाँ खोली ।।

ऐसा नहीं होता नादान जब सबका रखवाला भगवान ।।

दुःख सुख अंधियारा उजियारा, सब का समान करे बटवारा।।

दर्द का क्या है इसका रूख तुम, जैसे चाहो मोड़ लो दर्द को अपने गले लगालो, शेष चिन्ता छोड़ दो ।।

दर्द की स्याही कलम में भर लो, लेखक तुम बन जाओगे जो इस दर्द को सुरों में ढालो, गायक तुम कहलाओगे।। दर्द को अपनी शक्ति बना के, जीवन का रूख मोड़ लो दर्द को अपने गले लगालो, शेष चिन्ता छोड़ दो ।।

औरन का दुःख दर्द जो तुम, अपना दर्द बनाओगे अपने दर्द को हौले हौल“, कम होता तुम पाओगे ।।

दर्द में शक्ति भरी पड़ी है, जो इसको अपनाओगे सीढ़ियों तुम सफलता की, नितनित चढ़ते जाओगे

दर्द क्या है इसका रूख, तुम जैसे चाहो मोड़ लो दर्द को अपने गले लगालो, शेष चिन्ता छोड़ दो ।।

नादान दिल Poems in Hindi for Class 7

तुम्हें याद भी है कि याद नहीं, कुछ पल जो संग गुज़रे थे ये कायनात सारी अपनी थी, अपने ही चाँद सितारे थे ।।

तुम चले गये वादा करके, कि लौट के फिर जाओगे। दिन बीत गये सदियों जैसे, जाने आप कब आओगे।।

क्यों मैं तुझसे नाराज नहीं, क्यों तुझे अब भी चाहती हैूँ हल्की सी आहट पर भी, उमंगों में खो जाती हूँ ।।

तुझको मेरी परवाह नहीं, हर पल दिल को समझाती हूँ नादान है वो सुनता नहीं, तेरी ओर ही खिचता पाती हूँ ।।

तुमसे जो मुझको दर्दे मिला, सौगात सा रखना चाहती हूँ। इस दर्द के एहसास से, महसूस तुझे कर पाती हूँ ।।

क्यों मैं तुझसे नाराज नहीं, क्यों तुझे अब भी चाहती हूँ सूने से इस जीवन में भी, क्यों तेरा अक्स मैं पाती हूँ ?

कोई जान ना ले इस दिल की दशा, मैं आँसू अपने पी लूगी नहीं आते हो आओ तुम, वादों के सहारे जी लूगी ।।

प्रेम एक मृगतृष्णा Poems in Hindi for Class 7

लगाकर आग दिल में मेरे सोये हो तुम चैन से छलका दिया है आंसुओं को आज मेरे नैन से ।।

आंधियों ने घेर लिया, अपनों ने मुंह फेर लिया तड़प के तन्हा रह गयी, आज मैं इस रैन में ।।

इस कदर लगाकर आग दिल में, सोये हैं वो चैन से ।। मृगतृष्णा है जीवन मेर मंजिल भागे दूर अति दूर हौल सा उठता सीने में, भावनायें चूरचूर।।

दीपक संग पतंगा जलता, अगन बिरहा की मुझे जलाये रैना काटू तारे गिनगिन निर्मोही तुझे कौन बताये ।।

लगाकर आग दिल में मेरे, सोये हो तुम चैन से छलका दिया है आंसुओं को, आज मेरे नैन से ।।

पथिक Poems in Hindi for Class 7

जब राहें कठिन हो जाती हैं, और मंजिल लागे दूर अति दूर उस वक्त ना हिम्मत हारना, दामन साहस का थामना ।।

चाहे छोटे कदम बढ़ाना, बस रोक ना आने देना जो आगे कदम बढ़ायेगा, मंजिल निकट तू पायेगा ।।

बनकर हमसफर तेरा, सम्भवता कोई आयेगा हौसला अपना तेरा, हमसफर बन जायेगा .

चिंताओं में पड़े बिना, इक राह जो चलता जायेगा कठिन हों जितनी भी राहें, लक्ष्य तू अपना पायेगा ।।

दिलों की गहराईयो से Poems in Hindi for Class 7

कभी लहरों पर, कभी साहिल पर, तेरा दीदार हो जाता है तेरी एक झलक से ही, तुझसे प्यार हो जाता है ।।

गाती हो तो लगे जैसे, कोयल राग सुनाती हो तेरी एक नज़र ही जैसे, पानी में आग लगाती हो ।।

ओढ़ा जैसे मुख पर अपने, सुन्दरता का घुंघट है आँखों में सजे हैं सपने, मुस्कानों की रंगत है ।।

इस कदर हूँ खोया देख तुम्हें, जाने कब दिन ढल शाम हुई। मेरे इश्क की, दुनिया में, चर्चा2 अब सरेआम हुई ।।

मोह के धागे उलझे तुमसे, क्यों इन्हें सुलझाऊं मैं गिरहा जो सुलझाना चाहूं. और भी उलझा पाऊ मैं ।।

आशाएं Poems in Hindi for Class 7

ज़िन्दगी तू जितना भी ग़म दे, नहीं डगमगाऊंगी। कुछ पल रो लेने के बाद, फिर मुस्कराऊंगी।

गम को गले में उतार, कोयल सी कूक लगाऊंगी। इस जिन्दगी के गीतको, मीठा मधुर गुनगुनाऊंगी।

जिन्दगी तू जितना भी गम दे, नहीं लड़खड़ाऊंगी। खुदी का दामन थाम कर, बढ़ती ही जाऊंगी।

सूनी अंधियारी गलियों में, आशा का दीप जलाऊंगी। हर एक सपने को, साकार बनाऊंगी

ना गिड़गिड़ाऊंगी, ना तिलमिलाऊंगी, केवल खिलखिलाऊंगी।

बुलबुल जैसे इठलाऊंगी, छोटीछोटी खुशियां बुन, ओढ़नी सजाऊंगी

किसी ग़म के सामने, नहीं सिर झुकाऊंगी। ज़िन्दगी तू जितना भी ग़म दे, नहीं डगमगाऊंगी।

यादें Poems in Hindi for Class 7

यादों पे किसका जोर है, यादों की अपनी डोर है, यह डोर तेरे हाथों में, यह डोर मेरे हाथों में

कुछ वक्त की सौगातें हैं, यादों में जिनको पाता हूँ, कुछ खट्टीमीट्टी बातें हैं, संजोके रखना चाहता हूं।

यादों की रिमझिम घड़ियां जब, मेरी रूह भिगो कर जाती हैं, मैखाने क्यों जाऊं मैं, तेरी यादें नशा पिलाती हैं।

वह याद बड़ी अनमोल है, जो गली से तेरी गुजरती है, जबजब आंखें बन्द करूं, तेरी भोली सूरत दिखती है।

इन यादों की यह डोर है, यादों पे किसका ज़ोर है, यह डोर ना तेरे हाथों में, यह डोर ना मेरे हाथों में।

तड़पन Poems in Hindi for Class 7

पतझड़ में बहारों में, सागर के दूर किनारों में हरसु तुमको ढूंढा है, टिमटिम करते तारों में ।।

तड़प के तन्हारह गई, इस जहां की भीड़ में तू है तेरी याद हैं, दिल में बसी तस्वीर में।।

छिन पल, पल छिन सीने में, तेरी छवि बन रहते हैं अंघयारी रैना में जुगनू, सब मेरी कहानी कहते हैं।

कसक वो तेरी चाहत की, हूक पपीहे सी भरती हूँ। शमा है तेरे प्यार की, बन परवाना जलती हूँ ।।

तेरी खोज में कोई अंत नहीं, ढूंढ मैं तुमको लाऊँगी। सदियाँ बीतें या जुग बीते, कयामत भी पार जाऊँगी ।।

उड़ान Poems in Hindi for Class 7

छोटी सी इच्छायें हैं, छोटेछोटे सपने हैं छोटे हुए तो क्या हुआ, ये सब मेरे अपने हैं ।।

चंदा भी तो अपना था, झिलमिल तारे अपने थे तन्हा मुझको छोड़ा क्यों, सुख दुःख सारे अपने थे ।।

तू मीठे सपनों में सोया, मैं जागूँ तेरे सपनों में मदमाती तेरी महफिल है, मैं खड़ी अकेली अपनों में ।।

माना तू हरजाई है, जाना है तो जाओ तुम तुम संग प्रीत लगाई थी, सपनों में क्यों आओ तुम ।।

मैं ना वो पतंग रही, जेदी डोर थी तेरे हाथों में। तू बात में बात बदलता है, मैं अब ना आऊं बातों में ।।

निराशा मेरी अपनी थी, अब आशा मेरी अपनी है। जो काली रैना अपनी थीं, अब भोर सुहानी अपनी है।।

छोटे से मेरे दिल में, छोटेछोटे सपने हैं छोटे हुए तो क्या हुआ, ये सब मेरे अपने हैं ।।

प्रार्थना Poems in Hindi for Class 7

ये वक्त सुहाना लगता है,

कोई ख्वाब अंजाना लगता है इन छोटीछोटी खुशियों से, सुंदर आशियाना लगता है ।।

नन्हें कदमों से चलकर, जब बच्चे मेरे आते हैं मम्मी पापा कहकर जब, अपने गले लगाते हैं ।।

इस छोटे घरौंदे में तब, खुशियों की हवायें चलती है पवन के इन झोकों से, जीवन की नैया चलती हैं।।

जग के रखवाले भगवन, सदा दयालु तुम रहना और ना माँ ये कुछ मांगे, मुझे है इतना ही कहना ।।

स्पर्श Poems in Hindi for Class 7

पतझर से इस जीवन में, फूल हैं सूखे आशाओं के। सराबोर जो स्नेह से कर दे, वो मोहताज नही भाषाओं के।

भीड़ भरी इस दुनिया में, रूठा संबंध है अपनों का। बैठी बीच बाजार यहाँ मैं, क्या मोल है मेरे सपनों का

सुनी आंखों में ममता के, कई चित्र यहाँ है धांधली से। स्पर्श तेरा है याद दिलाता, वो खून के रिश्ते भूले से।

ममता जैसे पड़ती है छलक, क्या जादू है तेरे हाथों में। सपने सजीव मेरे हो जाते, इन पल भर के साथों में

आँचल की छाँव में बैठो तुम, शीतल कर दो मेरे मन को। पुत्र तुझे अपना समझूँ, स्पर्श करो जो मेरे तन को

मधुर पल Poems in Hindi for Class 7

मेरे घर में वर्षों बाद, खुशियाँ इतनी छाई है। दादी अम्मा से मिलने जो, बुआ हमारी आई हैं।

चार चाँद लगा खुशियों में, रौनकता बाढ़ आई है। बुआ जी मेरी साथ अपने, नई बहू को लाई है।

प्रमुदित मन हो दादी अम्मा, बैठा दोनों को अपने साथ लखलख दे रही आशीष, दोनों के सिर रख अपना हाथ

मधुर क्षणों को देखकर, बात सहसा मेरे मन में आई। कैद किया झट से कैमरे में, बहू घूंघट भीतर शरमाई।

बुआ घर में थी लाडली, उनसे रौशन था घर अंगना लाड़ जताते थे सभी, ऐसा सबका है कहना।

बाल गीत Poems in Hindi for Class 7

आओ मुन्नी संग हमारे, सुन्दर सा एक चित्र बनाएँ वृक्ष बनाएँ धरती पर, और वृक्ष पर फूल खिलाए।

फूल पर बैठी सुन्दर तितली, रंगविरंगे पंखों वाली। डोलती चंचल सी इतउत, इन्द्रधनुष सी रंगों वाली।

आओ मुन्नी आकाश बनाएँ, उसमें कालेकाले बादल उड़तेफिरते कालेकाले, झमझम पानी बरसाते बादल

कागज का फिर नाव बनाएँ, बहते पानी में उसे चलाएं। तेरीमेरी नाव चले जब, मीठे  सुर में गाना गाए।

जीवन संध्या Poems in Hindi for Class 7

छिड़ी रहती थी हरदम सरगम, जीवन का वह राग कहाँ है ? गूंजा रहता था हरपल आगन, अपनों का वह अनुराग कहाँ है ?

चलना सीखा पगपग जिसने, जीवन संध्या में छोड़ अकेला। दुनिया अपनी अलग बसा ली, मेरी सुनी हो गई संध्या वेला।

सुना आंगन रास आई, जीवन संगिनी टूट गई। समय कुचक्र चला कुछ ऐसा, हाय दुनिया मेरी लूट गई।

किस्से दुनिया को बेच रहा अब, तन्हा वक्त कटे कैसे? सुबहशाम है बोझिल सा, खोया पन्नों में ढूंढो जैसे

जरूरत है जिन्हें सहारे की, क्यों झेलते वे अभिशाप हैं ? मौन हो क्यों चुप्पी तोड़ो, क्या उत्तर आपके पास है ?

हथकड़ी Poems in Hindi for Class 7

हर पल उंगली चल रही, की पैड के संग। लोगलुगाई रंग गए, मोबाइल के रंग।

संबंधों में गई, अजब सी खटास। औंलाईन भरते सब, अनजाने रिश्तों में मिठास

ज्ञान बाँट रहे सब, करके बाते बड़ीबड़ी। अपनी तो वो ही जानें, देते ज्ञान खरीदारी।

बिन मोबाईल लगे जैसे, जिन्दगी है अधूरी। जाने अनजाने लग गई, मोबाईल की हथकड़ी

दरिंदों के नाम Poems in Hindi for Class 7

कर जाते हो मानवता को तार तार, हर बार करते वीभत्सता की हदें पार

जिन आँखों में ममता होती, वात्सल्य होता,

बहनबेटियों के लिए सम्मान होता।

जन्म देकर माँ तेरी पछताती होगी, तेरे ऊपर लाज भी लजाती होगी।

कलेजे को चीरती चीत्कार से, बेटियों की करुण सी पुकार से

आँखें निर्लज्ज और हृदय पाषाण कैसे? हो गए हो पशुता के पहचान जैसे

यादों की गलियाँ Poems in Hindi for Class 7

यादें मेरे बचपन की, वो गलियाँ मेरे गाँव की। हरी भरी खेतों की क्यारी, यादें पीपल की छाँव की।

पनिहारिन की पायल छम छम, आहट बैलों के पाँव की। रहिमन रामू काका दोनों के, किस्से उनके सद्भाव की।

दिवाली, होली, ईद मनाना, खुशहाली और मोद में। किस्से भर के आँख में सोना, नानी माँ की गोद में।

ईख चूसने की होड़ लगाना, अपने हमजोली के संग। हफ्ते भर में जो छूटे, ऐसे होली के थे रँग

सावन की थी बात निराली, नौका दौड़ कागज की कश्ती की। गूंज अभी तक कानों में है, नटखट सी मटरगश्ती की।

कोयल की सुर में सुर मिलाना, महुआ बीनना डलियाँ में मन आज भी अटका है, यादों की उन गलियाँ में।

कैसे लूँ मै हर पल जी Poems in Hindi for Class 7

पलपल करुण पुकार यहाँ, सिसकियों का बाजार यहाँ, कैसे कहते हो मुझसे ?

जाओ, सारे विष को पी। आओ तुम, हर पल जी।

याद निर्भया आती है, सवाल खड़े कर जाती है,

पलपल कितनी शाम्भवी पूछे,

कैसे होठों को लूँ सी कैसे माँ मै हर पल जी।

माघ मास की ठिठुरन Poems in Hindi for Class 7

सूरज दादा आओ ना थोडी सी गर्मी लाओ कोहरे ने खूब चलाई है तांडव करता पछुवा भाई है

इतराती बड़ी रजाई है धूप हुई हरजाई है। ठिठुरी दादी,

ठिठुरे दादा थोडी तरस तुम खाओ ना सूरज दादा आओ ना थोड़ी सी गर्मी लाओ

गीले तरु, घोंसले गीले चोंच गीली, पंख भी गीले जो उड़ते थे आसमा छूने बेबस चूजे उड़ना भूले ठिठुरी गौरैया,

ठिठुरा कागा थोडी तरस तुम खाओ ना सूरज दादा आओ ना थोड़ी सी गर्मी लाओ ना।

विनती मेरी मानो फौरन पलपल बढ़ती जाती सिहरन धूप हो गई जैसे बैरन आई जब से माघ की ठिठुरन।

ठिठुरी धरती, ठिठुरा अंबर थोडी तरस तुम खाओ ना सूरज दादा आओ ना थोड़ी सी गर्मी लाओ

धरती माँ Hindi Poem on Nature for Class 7

धरती माँ के आँचल पर, जब तक पौधे लहराएंगे।

प्राण वायु की सम्पन्नता से, सृष्टि के जीव हर्षाएंगे।

सुखी समृद्ध रहेगी सभ्यता, प्राणी प्रबुद्ध कहलाएंगे।

प्रण करो तुम धरती माँ का, आँचल हरा बनाओगे।

जय गान गूंजे सदियों तक, स्वयं में ऐसी प्रवृति लाओगे।

धरती पुत्र कहलाने का, कुछ तो मूल्य चुकाओ तुम

सेवा कर धरती माँ का, जन्म कृतार्थ बनाओ तुम।

https://www.youtube.com/watch?v=LIFGRNLZWk4

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