If you searching for the best Inspirational Poems in Hindi then you are in the right place. Here I’m sharing with you unique Inspirational Poems in Hindi which is really amazing and interesting I’m sure you will like it and appreciate it. These Inspirational poems also encourage you in your life.

1.आओ मन की गांठें खोलें Inspirational Poems in Hindi

यमुना तट, टीले रेतीले, घासफूस का घर डंडे पर, गोबर से लीपे आँगन में, तुलसी का बिरवा,

घंटी स्वर, माँ के मुँह से रामायण के दोहेचौपाई रस घोलें! आओ मन की गांठें खोलें!

बाबा की बैठक में बिछी चटाई, बाहर रखे खड़ाऊँ, मिलनेवाले के मन में असमंजस,

जाऊँ या ना जाऊँ? माथे तिलक, नाक पर ऐनक, पोथी खुली, स्वयं से बोलें!

आओ मन की गांठें खोलें! सरस्वती की देख साधना, लक्ष्मी ने संबंध जोड़ा,

मिट्टी ने माथे का चंदन बनने का संकल्प छोड़ा, नए वर्ष की अगवानी में टुक रुक लें, कुछ ताजा हो लें!

आओ मन की गांठें खोलें!

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. हरीहरी दूब पर Inspirational Poems in Hindi

हरीहरी दूब पर ओस की बूंदे अभी थीं, अब नहीं हैं। ऐसी खुशियाँ जो हमेशा हमारा साथ दें कभी नहीं थीं, कभी नहीं हैं।

तलवार की कोख से फूटा बाल सूर्य, जब पूरब की गोद में पाँव फैलाने लगा, तो मेरी बगीची का पत्तापत्ता जगमगाने लगा,

मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूँ या उसके ताप से भाप बनी, ओस की बूंदों को ढूँढें? सूर्य एक सत्य है

जिसे झुठलाया नहीं जा सकता मगर ओस भी तो एक सच्चाई है यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है क्यों मैं क्षणक्षण को जीऊँ?

कणकण में बिखरे सौंदर्य को पीऊँ? सूर्य तो फिर भी उगेगा, धूप तो फिर भी खिलेगी,

लेकिन मेरी बगीची की हरीहरी दूब पर, ओस की बूँद हर मौसम में नहीं मिलेगी।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. गीत नया गाता हूँ Inspirational Poems in Hindi

टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर, पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर, झरे सब पीले पात,

कोयल की कुहुक रात, प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ। गीत नया गाता हूँ।

टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी? अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी। हार नही मानूँगा,

रार नई ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखतामिटाता हूँ। गीत नया गाता हूँ।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. झुक नहीं सकते Inspirational Poems in Hindi

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते। सत्य का संघर्ष सत्ता से, न्याय लड़ता निरंकुशता से,

अँधेरे ने दी चुनौती है, किरण अंतिम अस्त होती है। दीप निष्ठा का लिये निष्कंप,

वज्र टूटे या उठे भूकंप, यह बराबर का नहीं है युद्ध हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध,

हर तरह के शस्त्र से है सज्ज, और पशुबल हो उठा निर्लज्ज। किंतु फिर भी जूझने का प्रण,

पुनः अंगद ने बढ़ाया चरण, प्राणपण से करेंगे प्रतिकार, समर्पण की माँग अस्वीकार।

दाँव पर सबकुछ लगा है, रुक नहीं सकते। टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. कदम मिलाकर चलना होगा Inspirational Poems in Hindi

बाधाएँ आती हैं आएँ, घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पाँवों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,

निज हाथों से हँसतेहँसते, आग लगाकर जलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।

हास्यरुदन में, तूफानों में, अमर असंख्यक बलिदानों में, उद्यानों में, वीरानों में, अपमानों में, सम्मानों में

उन्नत मस्तक, उभरा सीना, पीड़ाओं में पलना होगा! कदम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में, कल कछार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में,

क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शतशत आकर्षक, अरमानों को दलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा। सम्मुख फैला अमर ध्येयपथ,

प्रगति चिरंतन कैसा इतिअथ, सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ, असफल, सफल समान मनोरथ,

सब कुछ देकर कुछ माँगते, पावस बनकर ढलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।

कुशकाँटों से सज्जित जीवन, प्रखर प्यार से वंचित यौवन, नीरवता से मुखरित मधुबन,

परहित अर्पित अपना तनमन, जीवन को शतशत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. जंग होने देंगे Inspirational Poems in Hindi

हम जंग होने देंगे! विश्वशांति के हम साधक हैं, जंग होने देंगे!

कभी खेतों में फिर खूनी खाद फलेगी, खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,

आसमान फिर कभी अंगारे उगलेगा, एटम से नागासाकी फिर नहीं जलेगी, युद्ध विहीन विश्व का सपना भंग होने देंगे। जंग होने देंगे।

हथियारों के पैरों पर जिनका है डेरा, मुँह में शांति, बगल में बम, धोखे का फेरा, कफन बेचनेवालों से कह दो चिल्लाकर,

दुनिया जान गई है उनका असली चेहरा, कामयाब हो उनकी चालें, ढंग होने देंगे। जंग होने देंगे।

हमें चाहिए शांति, जिंदगी हमको प्यारी, हमें चाहिए शांति, सृजन की है तैयारी, हमने छेड़ी जंग भूख से, बीमारी से,

आगे आकर हाथ बँटाए दुनिया सारी। हरीभरी धरती को खूनी रंग लेने देंगे। जंग होने देंगे।

भारतपाकिस्तान पड़ोसी, साथसाथ रहना है, प्यार करें या वार करें, दोनों को ही सहना है, तीन बार लड़ चुके लड़ाई,

कितना महँगा सौदा, रूसी बम हो या अमेरिकी, खून एक बहना है। जो हम पर गुजरी बच्चों के संग होने देंगे। जंग होने देंगे।

Inspirational Poems in Hindi byअटल बिहारी वाजपेयी

  1. हिरोशिमा की पीड़ा Inspirational Poems in Hindi

किसी रात को मेरी नींद अचानक उचट जाती है, आँख खुल जाती है, मैं सोचने लगता हूँ कि

जिन वैज्ञानिकों ने अणुअस्त्रों का आविष्कार किया थाः वे हिरोशिमानागासाकी के

भीषण नरसंहार के समाचार सुनकर, रात को सोए कैसे होंगे?

दाँत में फँसा तिनका, आँख की किरकिरी, पाँव में चुभा काँटा, आँखों की नींद,

मन का चैन उड़ा देते हैं। सगेसंबंधी की मृत्यु, किसी प्रिय का रहना, परिचित का उठ जाना,

यहाँ तक कि पालतू पशु का भी विछोह हृदय में इतनी पीड़ा, इतना विषाद भर देता है कि

चेष्टा करने पर भी नींद नहीं आती है। करवटें बदलते रात गुजर जाती है।

किंतु जिनके आविष्कार से वह अंतिम अस्त्र बना जिसने छह अगस्त उन्नीस सौ पैंतालीस की कालरात्रि को हिरोशिमा

नागासाकी में मृत्यु का तांडव कर दो लाख से अधिक लोगों की बलि ले ली,

हजारों को जीवन भर के लिए अपाहिज कर दिया। क्या उन्हें एक क्षण के लिए सही,

यह अनुभूति हुई कि उनके हाथों जो कुछ हुआ, अच्छा नहीं हुआ? यदि हुई, तो वक्त उन्हें कठघरे में खड़ा नहीं करेगा,

किंतु यदि नहीं हुई, तो इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।

-Inspirational Poems in Hindi byअटल बिहारी वाजपेयी 

  1. अपने ही मन से कुछ बोलें Inspirational Poems in Hindi

क्या खोया, क्या पाया जग में, मिलते और बिछड़ते मग में, मुझे किसी से नहीं शिकायत, यद्यपि छला गया पगपग में,

एक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें।

पृथिवी लाखों वर्ष पुरानी, जीवन एक अनंत कहानी, पर तन की अपनी सीमाएँ, यद्यपि सौ शरदों की वाणी,

इतना काफी है अंतिम दस्तक पर खुद दरवाजा खोलें।

जन्ममरण का अविरत फेरा, जीवन बंजारों का डेरा, आज यहाँ, कल कहाँ कूच है, कौन जानता, किधर सवेरा,

अँधियारा आकाश असीमित, प्राणों के पंखों को तौलें। अपने ही मन से कुछ बोलें!

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. कौरव कौन कौन पांडव Inspirational Poems in Hindi

कौरव कौन कौन पांडव, टेढ़ा सवाल है। दोनों ओर शकुनि का फैला कूटजाल है।

धर्मराज ने छोड़ी नहीं जुए की लत है। हर पंचायत में पांचाली अपमानित है।

बिना कृष्ण के आज महाभारत होना है, कोई राजा बने रंक को तो रोना है।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. दूध में दरार पड़ गई Inspirational Poems in Hindi

खून क्यों सफेद हो गया? भेद में अभेद खो गया। बँट गए शहीद, गीत कट गए, कलेजे में कटार गड़ गई। दूध में दरार पड़ गई।

खेतों में बारूदी गंध, टूट गए नानक के छंद, सतलुज सहम उठी, व्यथितसी वितस्ता है, वसंत से बहार झड़ गई। दूध में दरार पड़ गई।

अपनी ही छाया से वैर, गले लगने लगे हैं गैर, खुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता, बात बनाएँ, बिगड़ गई। दूध में दरार पड़ गई।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. पहचान Inspirational Poems in Hindi

पेड़ के ऊपर चढ़ा आदमी उँचा दिखाई देता है। जड़ में खड़ा आदमी नीचा दिखाई देता है।

आदमी ऊँचा होता है, नीचा होता है, बडा होता है, छोटा होता है। आदमी सिर्फ आदमी होता है।

पता नहीं, इस सीधेसपाट सत्य को दुनिया क्यों नहीं जानती? और अगर जानती है, तो मन से क्यों नहीं मानती?

इससे फर्क नहीं पड़ता कि आदमी कहाँ खड़ा है? पथ पर या रथ पर? तीर पर या प्राचीर पर?

फर्क इससे पड़ता है कि जहाँ खड़ा है, या जहाँ उसे खड़ा होना पड़ा है, वहाँ उसका धरातल क्या है?

हिमालय की चोटी पर पहुँच, एवरेस्टविजय की पताका फहरा,

कोई विजेता यदि ईर्ष्या से दग्ध अपने साथी से विश्वासघात करे,

तो क्या उसका अपराध इसलिए क्षम्य हो जाएगा कि वह एवरेस्ट की ऊँचाई पर हुआ था?

नहीं, अपराध अपराध ही रहेगा, हिमालय की सारी धवलता उस कालिमा को नहीं ढक सकती।

कपड़ों की दूधिया सफेदी जैसे मन की मलिनता को नहीं छिपा सकती।

किसी संत कवि ने कहा है कि मनुष्य के ऊपर कोई नहीं होता, मुझे लगता है कि मनुष्य के ऊपर उसका मन होता है।

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।

इसीलिए तो भगवान कृष्ण को शस्त्रों से सज्ज, रथ पर चढ़े, कुरुक्षेत्र के मैदान में खड़े,

अर्जुन को गीता सुनानी पड़ी थी। मन हारकर, मैदान नहीं जीते जाते, मैदान जीतने से मन ही जीते जाते हैं।

चोटी से गिरने से अधिक चोट लगती है। अस्थि जुड़ जाती, पीड़ा मन में सुलगती है।

इसका अर्थ यह नहीं कि चोटी पर चढ़ने की चुनौती ही मानें,

इसका अर्थ यह भी नहीं कि परिस्थिति पर विजय पाने की ठानें।

आदमी जहाँ है, वहीं खड़ा रहे? दूसरों की दया के भरोसे पर पड़ा रहे?

जड़ता का नाम जीवन नहीं है, पलायन पुरोगमन नहीं है।

आदमी को चाहिए कि वह जूझे परिस्थितियों से लड़े, एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े।

किंतु कितना भी ऊँचा उठे, मनुष्यता के स्तर से गिरे, अपने धरातल को छोड़े, अंतर्यामी से मुँह मोड़े।

एक पाँव धरती पर रखकर ही वामन भगवान ने आकाशपाताल को जीता था।

धरती ही धारण करती है, कोई इस पर भार बने, मिथ्या अभिमान से तने।

आदमी की पहचान, उसके धन या आसन से नहीं होती, उसके मन से होती है।

मन की फकीरी पर कुबेर की संपदा भी रोती है।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. क्षमायाचना Inspirational Poems in Hindi

क्षमा करो बापू! तुम हमको, वचन भंग के हम अपराधी।

राजघाट को किया अपावन, मंजिल भूले, यात्रा आधी।

जयप्रकाश जी! रखो भरोसा, टूटे सपनों को जोड़ेंगे।

चिताभस्म की चिनगारी से, अंधकार के गढ़ तोड़ेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. गीत नहीं गाता हूँ Inspirational Poems in Hindi

बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं, टूटता तिलिस्म,

आज सच से भय खाता हूँ। गीत नहीं गाता हूँ।

लगी कुछ ऐसी नजर, बिखरा शीशेसा शहर,

अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ। गीत नहीं गाता हूँ।

पीठ में छुरीसा चाँद, राहु गया रेखा फाँद,

मुक्ति के क्षणों में बारबार बँध जाता हूँ। गीत नहीं गाता हूँ।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. मैं चुप हूँ, गाता हूँ Inspirational Poems in Hindi

सवेरा है, मगर पूरब दिशा में घिर रहे बादल, रुई से धुंधलके में मील के पत्थर पड़े घायल,

ठिठके पाँव, ओझल गाँव, जड़ता है गतिमयता,

स्वयं को दूसरों की दृष्टि से मैं देख पाता हूँ। मैं चुप हूँ, गाता हूँ।

समय की सर्द साँसों ने चिनारों को जुलूस डाला, मगर हिमपात को देती चुनौती एक द्रुममाला,

बिखरे नीड़, विहँसी चीड़, आँसू हैं मुसकान,

हिमानी झील के तट पर अकेला गुनगुनाता हूँ। मैं चुप हूँ, गाता हूँ।

अटल बिहारी वाजपेयी

  1. जीवन बीत चला Inspirational Poems in Hindi

कल, कल करते, आज हाथ से निकले सारे, भूतभविष्यत् की चिंता में वर्तमान की बाजी हारे,

पहरा कोई काम आया रसघट रीत चला। जीवन बीत चला।

हानिलाभ के पलड़ों में तुलता जीवन व्यापार हो गया, मोल लगा बिकनेवाले का बिना बिका बेकार हो गया,

मुझे हाट में छोड़ अकेला एकएक कर मीत चला। जीवन बीत चला।

अटल बिहारी वाजपेयी

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