If you are searching for Desh Bhakti Poem in Hindi then you are at the right place. Here I’m sharing with you the top 15 Desh Bhakti Poem in Hindi for every Country Lover. These Hindi Poems are really amazing and I’m sure you will like them.

  1. वन्देमातरम Desh Bhakti Poem in Hindi

हिंदुस्तान की बेटी हूँ हिन्दू मेरा धर्म, देशभक्ति श्रृंगार है मेरा मुझे कैसी शरम।

दुश्मन के नापाक इरादे जब करते मनमानी , तब भारत माँ के लाल उन्हें याद दिलाते नानी ,

निसदिन डटे रहें सरहद पर देश भक्ति गाना, या फहराते गगन तिरंगा या कहलाते बलिदानी,

दुश्मन भी थर्रा मेरे वीरों में इतना दम वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम

गुंजी सदा गोद में इसके वीरों की किलकारी, ध्रुव प्रह्लाद भरत लवकुश से बड़ी शक्तियां हारी,

हर भारतवासी पर माँ का कर्ज है इतना भारी , कितने लाल शहीद हुए कितनों ने की तैयारी ,

इस मिट्टी में वीर सपूतों को ही मिले जनम। वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम

  1. कलम हमारी Desh Bhakti Poem in Hindi

कलम हमारी बलिदानों की पावन पुण्य कहानी है। कलम हमारी वीर सावरकर वाला काला पानी है।।

कलम हमारी मीराबाई और चंदबरदाई है। कलम कबीर के दोहे तुलसी की चौपाई है।

कलम हमारी कंस मारने वाले कृष्ण कन्हाई को। शीश झुकाती कलम हमारी कौशलेश रघुराई को ।।

लहू पिलाती हूँ इसको ये ताकि लिखे निर्भय होकर। सच्चाई की राह चलेगी तेरे में हिम्मत बोकर।।

  1. हुंकार पुनः भरनी होगी Desh Bhakti Poem in Hindi

नहीं दिखते हैं आज मुझे ये गाँधी के खुद्दार यहाँ। घर संसद से बाहर छिपे हुए गद्दार यहाँ।।

है गाँधी जैसा कोई नहीं हैं सब गाँधी के भेष में। चोर उचक्के घूम रहे अब संतों के देश में।।

महिलाओं अबलाओं को निर्वस्त्र घुमाया जाता है। देश के वीर सपूतों को आतंक बताया जाता है ।।

श्वेत वस्त्र धारण करते हैं लाखों दाग हैं दामन में ये कैसा अभिशाप जहाँ पर माँ कटती है आँगन में।।

सुंदर पर्वत मालाओं की घाटी हमसे पूँछ रही। रक्त लहू से सनी हुई ये माटी हमसे पूँछ रही।।

भाई बहन का प्यार यहाँ है रक्षा राखी करती है।।

ये शस्य श्यामला धरती है इसमें गंगा की धारें हैं। यहाँ पद्मिनियां जौहर करती दोनों हाथ कटारें हैं।

ये देश है दुर्गा काली का ये देश है खप्पर वाली का ये दुष्ट दलों का संघारक हैं रण चंडी मतवाली का ।।

ये वीर शिवा की माटी है यहाँ प्रताप के भाले हैं।

काट बैरियों के जिनने यहाँ लाखों शीश उछाले हैं।।

ये देश है दुर्गा भाभी का ये देश है झाँसी रानी का ये देश आर्यभट्ट का है चाणक्य सरीखे ज्ञानी का।।

ये धरती है चेनम्मा की ये धरती है झलकारी की। स्वामिभक्ति की मूर्ति बनी ये धरती कीरतबारी की।।

त्याग और बलिदान की मूरत देश धाय पन्ना का है। गाँधी की प्रतिमूर्ति बनी ये देश आज अन्ना का है।।

कहाँ गया वो देश जहाँ की ऐसी गौरव गाथा थी। स्वाभिमान बलिदान त्याग से ऊँची विजय पताका थी।।

आज हमें गांडीव उठा टंकार पुनः भरनी होगी। अपना अस्तित्व बचाने को हुंकार पुनः भरनी होगी।।

  1. जवाब चाहिए Desh Bhakti Poem in Hindi

आंकड़ों और घोषणाओं से पिटारे भर रहे, जनप्रतिनिधि रोज़ नएनए घोटाले कर रहे।

कालेधन की राह दिल्ली क्या बताएगी, फुटपाथ पर भूखे गरीबों के उदर पूँछ रहे। पूँछ रहे हैं तिजोरी के खुले ताले,

पूँछ रही है नई उम्मीद सब पाले। पूँछती हैं झोपड़ी घर द्वार आँगन पूँछते। घोषणाएं पूछती जन मन के वादे पूँछते।।

पूँछती हैं घाटियाँ और ठंडे चूल्हे पूँछते, झील नदी नाव के जर्जर इशारे पूँछते।

घोषणाओं का हुआ क्या अब हिसाब चाहिए काले धन पर झूठ का अब जवाब चाहिए।।

धर्म पर होती सियासत दंगों के स्वर गूंजते। वो नये भारत के सपनों की हकीकत पूँछते।।

पूँछता विज्ञान मंगल की पहुँच को पूँछता। पूँछता इतिहास माटी का भूगोल पूँछता।।

पूँछती हैं घाटियाँ कश्मीर पर आघात क्यों? और वन्देमातरम पर भी कुठाराघात क्यों?

हो रही है इन्तेहा जुल्मों की क्यों अब देश में? सत्ता भी चुप्पी लिए क्यों इसी परिवेश में?

पूँछती हूँ मैं शहीदों की शहादत की शोक में। पूँछती हूँ बेटियाँ क्यों मर रही हैं कोख में।

घोषणाओं का हुआ क्या अब हिसाब चाहिए।

काले धन पर झूठ का अब जवाब चाहिए।।

  1. समय कह रहा Desh Bhakti Poem in Hindi

समय कह रहा बात नहीं आघात उन्हें दो भारत माँ। गोली बम से मारी हुई सौगात उन्हें दो भारत माँ।।

बहुत दे दिए भाषण तुमने बहुत लगाए नारे हैं। कश्मीर में शीश कटे वो भी हमको प्यारे हैं।।

शिव का डमरू पूँछ रहा डमडम हुंकारे डोल रहीं। इतिहास रचा जिन वीरों ने कुछ उनकी माएँ बोल रहीं।।

दीप बुझा और भाल फटा पर आस लगाए ज़िंदा हूँ। गूंगी बहरी है दिल्ली क्यों सोच के मैं शर्मिंदा हूँ।।

गोली बम की बारिश है अब भारत की परिपाटी पर।

चंद भेड़िये जता रहें हक काश्मीर की घाटी पर।।

मौन तोड़कर बुध्द स्वरों का आरपार की बात करो उधम सिंह सा जोश जगा दो राणा सी संघात करो।।

बोल रही है कुर्बानी अब नीति बदल दो भारत की। है रीत जहाँ की प्रीत सदा वो रीत बदल दो भारत की।।

  1. एक सैनिक का पत्र (पत्नी का त्याग) Desh Bhakti Poem in Hindi

कैसे तुमको रोकूँ सजना कैसे प्यार जताऊँ मैं ? दिल के कोने में क्या रखा कैसे तुम्हें दिखाऊँ मैं?

रात चाँदनी संग तुम्हारे बोलो कैसे इठलाऊँ मैं ? प्यार भरा कैसे कोई मधुरिम संगीत सुनाऊँ मैं ?

जब मातृभूमि संकट में है तुम्हें क़र्ज़ चुकाना है। ये प्यार मोहब्बत छोड़ तुम्हें अपना फ़र्ज़ निभाना है।

राष्ट्रभक्ति से बढ़कर होता है कोई किरदार नहीं बने देश की रक्षा में बाधक ये मेरा प्यार नहीं

इसीलिए हे प्राणनाथ मेरी यादों में मत पड़ना ये मेहंदी वाले हाथ भुला के सिंह सरीखे से लड़ना

जब शत्रु दलों के आगे जाकर के ये शूर लड़ेगा।

तब संग तुम्हारे सरहद पे मेरा सिन्दूर लड़ेगा। प्राणनाथ सौगन्ध तुम्हें इन पायल के झंकारों की

प्राणनाथ सौगन्ध तुम्हें इन कंगन चूड़ी हारों क्री प्राणनाथ सौगन्ध तुम्हें मेरे ऊपर उपकारों की

प्राणनाथ सौगंध तुम्हें मेरे सोलह श्रृंगारों की। मातृभूमि की रक्षा में चाहे रण में शीश कटा देना

किन्तु शहादत से पहले दुश्मन को धूल चटा देना।।

  1. (पति का जवाब) Desh Bhakti Poem in Hindi

कैसे खुद को रोकूँ बोलो कैसे तेरा बखान करूँ, तेरे त्याग समर्पण का बोलो कैसे गुणगान करूं ।।

आज मिलन की रात प्रेम को बात नहीं कर पाया मैं खुशियों की झोली तक सजनी आज नहीं भर पाया मैं

किन्तु जहाँ तेरे सुहाग की जाकर घन गर्जन होगी। इन पैरों के नीचे शत्रु और हाथों में गर्दन होगी।।

मुझे नहीं परवाह कोई बस जीत के मुझको आना है दुश्मन की छाती चढ़कर मुझे तिरंगा फहराना है ।।

सीमा पर जाकर दुश्मन हेतु मुझे जलजला बनना है। मेरी खातिर प्राणप्रिये अब तुम्हें उर्मिला बनना है

किन्तु अगर फिर ओढ़ तिरंगा वापस घर को आऊँ मैं भारत माँ की रक्षा में गर अमर शहादत पाऊँ मैं

हाथ लिए बन्दूक मात चरणों में शीश चढाऊँ मैं सरहद पर जाकर कोई इतिहास नया रच जाऊँ मैं

तो मेरी मौत पर भी तुम कोई आंसू मत छलका देना मेरी चिता की राख उठा मत्थे सिन्दूर लगा लेना।।

  1. सैनिक का कर्ज़ Desh Bhakti Poem in Hindi

सूनी गोद हुई किसी की किसी ने भाई खोया है। राजनीति भी चुप है क्यों सिंहासन भी सोया है।

त्याग तपस्या और शौर्य से हमको सुरक्षित करते हैं वे ही सैनिक सीमा पर अब कहाँ सुरक्षित रहते हैं।।

कोई जाने कि सैनिक का जीवन कैसा होता है जो कि शहादत के आँचल में हँसतेहँसते सोता है।।

राष्ट्रधर्म ये कहता कुर्बानी का कोई तोल नहीं कुछ पैसे दे देना ही तो बलिदानों का मोल नहीं।।

बीबी बच्चों की आँखों के झरझर बहते पानी को।

क्यों मंत्री जी समझ पाते सैनिक की कुर्बानी को।।

सरहद पर जाकर दुश्मन से क्या मंत्री जी लड़ लेते।

सैनिक लड़ता तो फिर इतिहास कौन सा गढ़ लेते।।

जबजब पूजा और अर्चना करने को दीप जलाना तुम। याद शहीदों को भी करके अपना शीश झुकाना तुम।

मैं कविता लिखती हूँ बस इतनी सी बात बताने को। पूरा जीवन भी कम है सैनिक का कर्ज़ चुकाने को।।

  1. ज़र्राज़र्रा रोया था Desh Bhakti Poem in Hindi

ज़र्राज़र्रा कहता जिसका वीरों की अमर कहानी को। देशधर्म हित त्याग दिया हो जिसने भरी जवानी को।।

रणस्थल में देख जिन्हें दुश्मन भी डर जाते थे। रणबांकुरे को देख स्वप्न में अकबर भी घबराते थे।।

भुला नहीं पाएंगे हम उस भामा के बलिदान को। चेतक पर जो युध्द कर गए रणवीर महान को।।

जहाँ नारियों की अपनी एक अलग निशानी हो गयी।

एक देशहित बलिदान हुई एक प्रेम दिवानी हो गयी।।

पन्नाधाय ने देशहित अपना लाल भी खोया था।

उसकी इस कुर्बानी से ज़र्राज़र्रा रोया था।।

चित्तौड़ के किस्से अपनी अपनी अलग कहानी कहते हैं।

हर भाषा हर जाति धर्म के लोग यहाँ पर रहते हैं।।

नमन मेरा उस वीर भूमि को वीरों को जिसने जाया है। जिनकी कुर्बानी को अब तक कोई भुला पाया है।।

क्यों हाथ पे हाथ धरे बैठे क्यों भूलें उस परिपाटी को। क्यों भूलें राणा की वीरता क्यों भुलें हल्दीघाटी को।।

राष्ट्रधर्म के लिए कर गए रक्षा हिंदुस्तान की। वीरों से है भरी पड़ी ये भूमि राजस्थान की।।

  1. क्या लिखू? Desh Bhakti Poem in Hindi

मैं मोहब्बत के इठलाते फ़साने क्या लिखूँ? प्यार में डूबी लहरों के मुहाने क्या लिखेँ? जब देश को ज़रूरत है लहू के हर बूंद की तो मदहोश अल्हड़ यूँ शाम के तराने क्या लिखू?

रात दिन चौकस खड़े हैं सर उठा के सीमा पर, मैं उनकी पीड़ा छोड़ चाँद तारे क्या लिखेँ? शब्द को ही धार देती हूँ कि वो हथियार है, फूल से नाज़ुक अदाओं के इशारे क्या लिखेँ?

अस्मिता अस्तित्व संकट के घनों में घिर चुके, फिर पुरानी जीत की हासिल निशानी क्या लिखू? भूख से रोकर के बच्चा सो गया फुटपाथ पर दिल्ली बतला दिल से अब झूठी कहानी क्या लिखू ?

सोच हर हालात में बदलो ज़रा सा ठान लो, गुज़रे वक़्त की असफल कहानी क्या लिखो? मुल्क को ज़रूरत एक झाँसी की रानी की पड़ी, लैला मजनू की वो जर्जर जवानी क्या लिखू?

  1. क्या होगा? Desh Bhakti Poem in Hindi

इस तरह मोम्बात्तियाँ जलाने से क्या होगा? यूँ दुर्घटनाओं पर शोक मनाने से क्या होगा?

देश अपना लुटा पिटा वीरान सा है, उनके भाषण से दिल बहलाने से क्या होगा ?

जब दरिंदे ही बैठे हैं सन्त की खाल ओढ़कर, दहलीज़ पर पर्दे लगाने से क्या होगा?

हमने चुना नहीं वो थोप दिए गए हम पर ऐसे नेताओं के देश चलाने से क्या होगा?

  1. किसी ने पूछा क्या? Desh Bhakti Poem in Hindi

देखो तो इतिहास के पन्ने शर्मसार कर जाते हैं, कुछ लोगों की गलती से ही भगत सिंह मर जाते हैं

सारे चुप हैं क्या कहने को ये ज़बां भी डरती है, सिंधिया की गलती से ही तो लक्ष्मीबाई मरती है।।

किसने बुलाया जलियांवाला बाग किसी ने पूछा क्या? कैसे हुआ था भारत ये बर्बाद किसी ने पूछा क्या?

किसने जाकर गुरु गोविंद की ख़बर बताई मुगलों को ? कैसे हुआ था भारत ये बर्बाद किसी में पूछा क्या? गद्दारों को कुर्सी दी थी दिल्ली के दरबारों ने,

देशभक्ति से किया किनारा चापलूस मक्कारों ने।।

चन्द दिवानों ने ही तो जमकर के लड़ी लड़ाई थी,

झूठ है ये कि बिना खड्ग हमने आज़ादी पायी थी।।

  1. मातापिता Desh Bhakti Poem in Hindi

साथ होता है वो दूर रहकर भी, माँ धरती तो पिता आकाश होता है।

चोट देकर भी तरशेगा पकाने तक हमें, बन के वो ऐसा कुम्हार पास होता है।।

जो हमने पाली मन्ज़िल बिना तकलीफ के ज्योति उनका विश्वास हमेशा ही साथ होता है।

उन्होंने खाईं हैं बहुत ठोकरें मेरी ख़ातिर, कामयाबी में मेरी उनका हाथ होता है।।

  1. जब माँ ने मस्तक चूम लिया Desh Bhakti Poem in Hindi

जन्म दिया जिस माँ ने तुमको पाल पोसकर बड़ा किया। जिनके आशीषों ने धरती से अम्बर तक खड़ा किया।।

बैठे पापा के कांधे पर दुनिया भर को घूम लिया। कष्ट समूचे दूर हुए जब माँ ने मस्तक चूम लिया।।

मन से सदा दुआ निकली मेरे बच्चे आबाद रहें। पूजा और अर्चना में भी माँ को बच्चे याद रहे।।

जिन बच्चों की ख़ातिर माँ ख़ुद भूखी ही सो जाती थी। ताजा खाना तुमको दे खुद बासी रोटी खाती थी।।

दौलत गाड़ी बंगला तुमको आज ज़रूरी लगता है। पर माँ का चश्मा बनवाना क्यों मजबूरी लगता है।।

थोड़े पंख लगे तो मैंने माँ से रिश्ता तोड़ दिया। ख़ुद की ख़ातिर महल और माँ को वृद्धाश्रम में छोड़ दिया।।

माँ के बिन क्या शेष बचेगा खुद की कहो कहानी में। बेशर्मों तुम डूब मरो जाकर चुल्लू भर पानी में।।

मन्दिरमस्ज़िद गुरुद्वारे का चाहे जो भी अर्थ रहा। मातापिता दुःखी हैं तो फिर सारा जीवन व्यर्थ रहा।।

  1. माँ Desh Bhakti Poem in Hindi

मैं जब भी होती हूँ उसके साथ तो खोलकर रख देती हूँ खुद को कतराकतरा अलगअलग बिल्कुल बिखेरकर,

अपने दुख अवसाद,असफलता, सफलता,अपनी कमजोरियाँ, बेबसी,व्यथा,पीड़ा,

अपनी योजनाएं,अनुभव सब कुछ जो अंदर ही अंदर मुझे सालता है जो नहीं कह पाती मैं किसी और से बिखेर देती हूँ उसकी गोद में खुद के साथ

वो सब कुछ सुनती है एक संयमित श्रोता की तरह

और माथे पर फेर देती है अपना जादुई हाथ जैसे हर एक परेशानी को उससे टकराना होगा पहले

मानो सीझना चाहती है सारा दर्द एक छुवन से अपने आँचल से ढाँप लेती है दुनिया से बचाकर

और फिर कतराकतरा बड़े सलीके से जोड़कर मुझे खड़ा कर देती है फिर अपनी जगह कार्य करने को।।

Thank you for reading Desh Bhakti Poem in Hindi I’m sure you would like it. These poems you can share with your friends and family. As we all know how our soldiers sacrifice their friends and family for us This is just a small tribute for them.

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