Poem on Mother in Hindi:- If you’re searching for the best Poem on Mother in Hindi then you’re at the right place, Here I’m sharing with you the top 10 heart touching Poems on Mother in Hindi which is really amazing and mind-blowing. Their Poems are written by very famous writers who got many awards for their poems.

  1. वो है मेरी माँ Poem on Mother in Hindi

मेरे सर्वस्व की पहचान , अपने आँचल की दे छाँव, ममता की वो लोरी गातीमेरे सपनो को सहलाती  गति रहती,

मुस्कराती जो  वो है मेरी माँ प्यारी माँ  प्यार समेटे सीने  में जो  सागर सारा अश्को में जो  हर आहाट  पर मुड़ आती जो  वो

है मेरी माँ प्यारी माँ  दुःख मेरे जो समेट  जाती  सुख की खुसबू बिखेरती जो  वो मई मेरी माँ प्यारी माँ ….

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  1. माँ Poem on Mother in Hindi with Love

की सच कहते है की जिंदगी मिलना ना आसान है  और जिसने मुझे जिंदगी दी हाँ वो मेरी माँ है  जब पहेली बार देखा उसको तो उसका चहेता खिला था  जब पहेली बार देखा उसको तो उसका चहेता खिला था की आँखों में मेरे अंशु थे और मेरी रूप में उसे एक बीटा मिला था  जब मैं हसु तो वो हस  देती है तो वो रो देती है 

कितना ना  समझ था मैं की मुझे भी पता था की माँ क्या होती हैं  ना  हाथ से निवाला उठाया जाता था और ना पैरों से खुद चला जाता था जब माँ की हाथ का एहमियत था  मुझे तब पता लग जाता था  रोना तो मेरे लिए बहुत आसान होता था  रोना तो मेरे लिए बहुत आसान होता था  तब आसूं पोछने के लिए उसी का हाथ आगे आता था  जब

थोड़ा बड़ा  हुआ तो लगा की रिश्ते भी बहुत होतें हैं लेकिन हर रिश्ते माँ के बाद ही होतें हैं  जब अकेला रहा जिन्दगी में  जब अकेला रहा तो उसकी याद आयी जब अँधेरे में था तो उसकी याद आयी  जान भूख लगी तो उसकी याद आयी  और जब नींद आयी तो उसकी याद आयी  सोचने में कितनी आसान लगती थी  जिंदगी  जब खुदसे

जीना सीखा तो उसकी याद आयी  तभी लगा की माँ इतनी  मतलबी कैसे हो सकती है की काम से ज्यादा हमारे लिए कैसे सोच शक्ति हैं  लेकिन सच तो ये है की वो माँ ही होती हैं  जो हमारा पेट भर कर खुद भूखा सो सकती हैं जब अकेला निकला था जिंदगी  की दौर  में तब उसका  हाथ फ़ी याद आया  इस बार बस अकेला रोता  हूँ  और

आशु पोछने भी कोई नहीं आया अब तो सिख लिया था खाना अब तो चल भी खुद लेता हु  बड़ा खुद को कितना भी समझ लूँ पर अभी भी मैं उसका वही बीता हु की खुस हमारी खुसी पे और परेशान हमारे दुःख में होतीं हैं और सामने हमारी हस्ती हैं फिर पीछे उतना ही रोती  हैं 

अब माँ एक बात मैं तुझसे कहता हु इसके बाद मुझे कुछ ना कहना  की जन्दगी में तू मेरे साथ हैं की मैथ पे भी मेरे साथ ही रहना

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  1. शुरुआत कहा से करूँ Poem on Mother in Hindi

नहीं समझ आता माँ की शुरुआत कहा से करूँ तुम्हारा थोड़ा सा क़र्ज़ चूका पौन मैं आज ऐसा क्या लिखूं बचपन से लेके आज तक हर दिन मेरे धयान रखा है तुमने  दर्द रहता है तुम्हारे हैट में पर कभी कहाँ कुछ कहा है तुमने आज क्या बनाऊं तेरे लिए  हर रोज कितने प्यार से पूछती हो 

मेरी हर चीज का घ्यान रहता है तुम्हे फिर क्यों अपनी दवा लेना भूलती हो माँ एक बात बताओ  आखिर इतना बड़ा  दिल कहाँ से पाया है तुमने जो हर बार  अपने हिसे का खाना अपने हाथो से खिलाया है तुमने हमारे बारे में सोचते सोचते अपने बारे में सोचना भूल गयी ना 

इतना कुछ दिया मुझे हमेशा और आज फिर अपने लिए कुछ लेना भूल गयी ना माँ मुझे तो याद भी नहीं है की आखरी बार तुम शॉपिंग पे गयी है कोई बात हो या ना हो पर घर आते जिसका चेहरा देखना चाहता हूँ वो तुम हो माँ , हार जॉन भी अगर कभी जिसको देखके फिर जीत जाता हूँ 

वो तुम हो माँ , माँ चलो ना आज साथ बेथ कर थोड़ी बात करते हैं मेरे नहीं बल्कि आज तेरे बचपन को याद करते हैं माँ मुझे पता है मैं बहुत बुरा हूँ तुम इतना कुछ करती हो मेरे लिए और मैं कहा कुछ करता हूँ तुमने हर गलतियां मेरी हस्ते हस्ते माफ़ की हैं 

और फिर भी मैं तुमसे लरता हूँ सॉरी माँ खुद को देखता हु ना जब तो  में दिन रात सपनो के पीछे भागता रहता हूँ पर जब तुमने देखिता हूँ तो तुम में भी सिर्फ खुद को देखता हूँ माँ कैसे ? कैसे तुमने मेरे लिए अपने सारे  खवाब तोर दिए सपने तो रहे होंगे तुम्हारे भी कभी और फिर कैसे इतनी आसानी से छोर दिए 

मेरे ना एक दोस्त है माँ जिसके पास उसकी माँ नहीं  हैं  खाना खाया क्या बेटा  तुमने  ऐसा कोई पूछने वाला नहीं हैं एहसास तब होता हैं माँ की मैं सच में बहुत खुश किस्मत हु जो अपनी इन उँगलियों में मैं आज भी तुम्हारा हाथ देख पाता  हु माँ बस इतनी दुआ है उस रब से की वो सपने दूर रहे मुझसे 

जिसमे मई तुम साथ ना हो जिस बात से तुम्हारे दिल को ठेस पहुंचे माँ मेरे जूबा पे कभी वो बात ना हो , हर चीज मुझे सिखाई है हर चीज मुझे बताई है मैं लापरवा सा हु पर वो कमी भी मेरी सराही है कभी कभी सोचता हु की ये जिंदगी कैसी होती हैं 

बिन तुम्हारे आखिर मेरी ये  रातें कैसी होती हैं बचपन में बहुत रोता  था माँ दो पल के लिए भी अगर  तुम्हारा चहेता ओझल हो जाए सोचने से भी रूह कांप उठी अब तो बस दुआ है की कभी वो रत आये कोई सपने भी पुरे ना हुए ना अबमाँ मुझे कोई गम नहीं होगा , मेरी माँ मेरे साथ हर वक्त है इसे ज्यादा सकूँ अब कहा होगा !

  1. माँ मुझे तुम्हारी बहुत याद आती हैं Poem on Mother in Hindi

जब भी कभी सामने ठंडी रोटी पड़ोसी जाती है , जब सब्जी कभी पसंद की नहीं होती जब भी कभी खाते वक्त हिचकी आजाती है माँ मुझे तुम्हारी बहुत याद आती हैं जब भी कभी दिल में एक टिस उठती है जब आँखों में बारबासी आंशुओ की बढ़ आजाती है 

माँ मुझे तुम्हारी बहुत याद आती हैं , जब किताबो में झाकते हुए आँखे दुःख जाती है जब रात को कई दफा नींद नहीं आती या फिर कभी भूखे पेट ही आँखे बंद हो जाती है माँ मुझे तुम्हारी बहुत याद आती हैं , याद  आता है मुझे मेरे चहरे पे एक हलके से दाग 

की वजह से पुरे दिन भूखे रह जाती थी याद आती है मुझे वो कहानियां भी जब जला तो मैं था लेकिन आँखे तुम्हारी रोइ थी।  याद आती है मुझे उन ठंडी रातों में जब मुझे एक छींक आती थी तो रातों में कैसे सिगरी से गर्मी दे जाती थी और जब कभी सुबह आंखे नहीं खुलती थी 

तुम सिरहाने बैठ कर कितना कुछ सीखा जाती थी , कैसे मेरे बीमार परने  पे मंदिर मंदिर माथा टेक  आती थी और इंतहा तो ये हो गयी की जब भी तुमने चपत (स्लैप ) लगाई भी तो कमरे में जा कर के खुद रो आती  थी , यूँ तो मैं किसि से  कुछ नहीं कहता 

मगर कभी जो पैर कॉलेज से कमरे  लौटने को तैयार नहीं होतें  या कभी जो गन्दी जींस पहनी होती हैं  माँ तुमसे की गयी हर शिकायत याद आती हैं माँ मुझे तुम्हरी बहुत याद आती हैं , कैसे तुम मेरा हर दर्द भाप जाती थी 

कैसे तुम मेरा हर दर्द भाप जाती थी मेरे हर गलत कदम को पहले ही रोक देती थी याद आती है की कैसे मेरे  हर मुश्किल तुम दिवार बन जाती थी अब कभी जो कोई दर साल जाता हैं  कभी जो मेरी आँखे डब डबा जाती है माँ मुझे तुम्हारी बहुत याद आती हैं

  1. मेरी माँ Poem on Mother in Hindi

किसी ने क्या खूब कहा हैं  आखें खोलूं तो चेहरा माँ का हो  आंखे बंद हो तो सपना माँ का हो  मैं मर भी  जाऊ तो कोई गम नहीं  बस कफ़न मिले तो दुपटा माँ का हो  माँ कहना कितना अच्छा लगता हैं  ये रिस्ता कितना सच्चा लगता हैं  ना कोई स्वार्थ ना कोई बैर जिंदगी व्यर्थ है इनके बगैर 

वो कहते है भगवन का दूसरा नाम माँ  है  मैं कहता हु माँ का दूसरा नाम भगवन है  मानता  हु मैं सबसे ज्यादा माँ से ही लरता हु  पर यार सबसे ज्यादा प्यार भी तो उन्ही से करता हूँ  और इस रिश्ते को सब्दो में बया नहीं किया जा सकता  दुनिया की नजरो में मेरी  कामयाबी  खटकती है

 मगर दो आँखे ऐसी है जिस से सिर्फ प्यार की रोशिनी मेहेकिती हैं  पूछता है अगर कोई मुझसे  की दुनियां में अब महोबत बची ही कहा हैं  मैं मुस्कुरा देता हूँ  और याद आजाती हैं माँ 

आए खुदा तुमने मुझे इस धरती पर कितना खूब सूरत तौफा दे दिया  अब और क्या ही मांगू तुझ से तू ने तो मुझे माँ के रूम में सारा जानत थमा दिया  खुदा से गुजारिश करूँगा की जिन हाथों ने मुझे दुआ मांगना सिखाया है  उस माँ को हमेशा सलामत रखना।

  1. ये जो माँ होती हैं ना यार बहुत कमल होती हैं Poem on Mother in Hindi

खुद के खाने का भी पता  नहीं होता लेऔर  आपके फ़ोन बैटरी  का भी ध्यान रखती हैं  बचपन याद है जब सुबह पापा से जाते वक्त दो रूपए अलग से ले कर अपने पालू से बांध लेती थी और  आइस क्रीम वाले के आने पर  निकल के देती थी 

माँ की ये ममता हर युग में ऐसी ही रही हैं  फिर चाहे वो भलाल देव और भाहुबलि के लिए शिवगमनी या शिवा के लिए देव् सेना या फिर बिना जन्म दिए भगवन कृष्ण को पलने वाले यशोधा माँ  या फिर देश के लिए अपने बेटे से दूर रहने वाली प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी की माँ 

या अपने बचो के लिए किसी और के घर में काम करने वाली माँ या मेले में खिलोने बेचते हुए  दूध पिलाने वाली माँ या फिर शरहद पे रक्षा करते हुए जिंदगी बिताने वाले  बेटे के लिए तड़पती माँ  हर अनार्थ आश्रम में बच्चे को संभालती वो हर नर्श  दौर  चाहे जो भी हो  रूप चाहे जो भी हो 

सब बदला बस एक वो नहीं बदली क्यों की ये जो माँ होती हैं ना यार बहुत कमाल  होती हैं  और इन सब पे  मुनव्वर राणा का वो शेर याद आता हैं की 

देख ले अँधेरे मुँह तेरा काला  हो गया माँ ने आंखे खोली  घर में उजाला हो गया

शाम को घर आके  आँखे सबसे पहल उसी को ढूंढ़ती हैं  शुकुन तभी मिलता हैं  जब आखो के सामने माँ  होती हैं , रूमाल से लेके मोज़े तक उठने से लेके सोने तक और हसने से लेके रोने तक हर जगह सर माँ ही याद आती हैं  क्यों की वो मेरी टीशर्ट  जो मुझे पहनी हैं वो सिर्फ माँ को पता है 

क्यों की  मेरी बाइक की चाभी मैंने रात को सोते वक्त  यही कही रख दी थी वो सिर्फ माँ को पता हैं , और वो पेट भरने के बाद भी एक और रोटी मेरे थाली में रख देना  क्यों की वो घी  वाली  रोटी  मुझे बहुत पसंद हैं और ये सिर्फ मेरी  माँ को पता हैं 

और वो मेरी आखों को समझ की आज मुझे गले लग कर रोना है या  काम से थक कर गोद  में सोना हैं  वो सिर्फ माँ को पता हैं  क्यों की ये जो माँ होती हैं ना यार बहुत कमल होती हैं  मैं जब तक घर ना आउ तब तक सोएगी नहीं मेरी कोई भी गलती पापा से 

कहेगी  नहीं  , दूर हु घर से तो रात को नींद नहीं आती होगी  दूर हु घर से तो रात को नींद नहीं आती होगी उसे फ़ोन काटने के बाद पता है  बहुत रोती  हैं  लेकिन मैं रोऊँ इस लिए जोर से झूठा हस्ती हैं मगर रोएगी नहीं 

अंधी हो जाए  या पागल हो जाए  या यादास चली जाए मगर अपने बच्चों को  नहीं भूलती  क्यों की ये जो माँ होती हैं ना यार बहुत कमल होती हैं बहुत कमल होती हैं  

  1. जब जब खुद को अकेला पाया Poem on Mother in Hindi

जब जब खुद को अकेला पाया दूर तक कोई नजर ना आया  तब तुमने मेरा हाथ थाम कर  इस अकेले पल को मिटाया  जब जब मैं इन  राहों में, भटक गया था मंजिल से  तब तूने एक उजाला बनकर , मुझे खोये रास्ते  पर लौटाया 

जब कोई मेरी खुशियों में शामिल होने आया था  माँ तुम ही तो थी वो जिसने हर पल मेरा हौसला बढ़ाया  सब समझते थे मुझको जुगनू  हूँ मैं आवरा सा  तुम्ही से तो मैंने माँ , सितारे का दर्जा पाया 

झांक लिया हर कोने में हर लम्हे को देख लिया  समझ गया है कुछ भी नहीं बिना तेरे ये दुनिया  मेरे जीवन के हर लम्हे में तेरी मौजूदगी बानी रहे  जब मई खुद को अकेला पाऊँ  माँ  तू  हाथ थामने खड़ी रहे। 

  1. Latest Poem on Mother in Hindi

कैसे बचपन में उंगली पकर के चलना सिखाया था उन्होंने  भागते भागते गिर जाता था तो उठना सिखाया था उन्होंने  घर में सबसे पहले उठ के हर काम करती हैं वो आज भी  सबकी डाट सुन कर भी खामोश रहती हैं आज भी 

मेरे चहरे पे सिकन भी आजाये तो पहचान लेती हैं वो  मैं कितना डांट लू सुना लू फिर भी मुस्कुराती रहती हैं वो  थोड़ी अनपढ़ हैं दो रोटी मांगू तो चार रख देती हैं  50 रूपए मांगू तो 100 रख देती हैं  पर कोई नहीं माँ तो माँ हैं 

बचपन से लेके आखरी सांस तक माँ हमारे लिए बहुत कुछ  करती है और ये समझते समझते हमारी पूरी उम्र निकल जाती हैं  हडियों के टूटने जितना दर्द झेल कर हमें पैदा करना  रात रात भर जग कर हमें चैन से सुलाना 

हमारे भूक लगने से पहले ही हमारे लिए स्वादिस्ट खाना तैयार करलेना  घर के हर एक सदस्य की ज़िम्मेदारी को पुरे दिलो जान से निभाना  कैसी कैसी मुश्किल घड़ी का सामना किया लेकिन कभी बच्चो पे आंच आने दी 

जब बिना मांगे मिल जाता था तो उनके खाने में नुक्स निकालते थे नखरे करते थे  आज घर से दूर जब मांगने पर भी नहीं मिलता तो याद आती है उस ना पसंद दाल की बिना नमक की सब्जी की  वैसे कितने ही 5 स्टार होटल्स में मैंने खाना खा के देखा लिया 

माँ के हाथ के खाने का कोई जवाब  ही नहीं  मुझे आज भी याद है जब मेरा पहला ब्रेकअप हुआ था  मैंने अपनी माँ की गोद  में जा कर खूब रोया था  आये दिन हर कोई हमसे नाराज़ रहता है बस एक माँ  ही हैं जो कभी हमसे रूठ नहीं  पाति 

कभी घर से निकल भी जाएं तो उनकी दुआएं कभी पीछा नहीं छोरती  हमेसा साथ रहता हैं  पापा के मार से कई बार बचाया है उन्होंने, खुद को कुछ हो जाए तो कोई गम नहीं हमें ना कुछ कभी होने देती  दुनिया से लड़  झगर के सिर्फ गोद में सर रख लून साड़ी परेशानियां ही निकल जाती है मानो 

उनकी इज़्ज़त जितनी करो काम ही हैं उन्हें प्यार जितना दो काम ही हैं  हम उसके बावजूद भी कई बार उनकी इज़त करने से चूक जातें हैं  या उनके बूढ़े होते होते उनको बोझ समझने लगते हैं  अगर है तुम्हरी जिंदगी माँ आज भी तो उनके पास दो

वक्त बैठ के उनसे बात कर लिया करो, उन्हें अच्छा लगेगा माँ कई नहीं होती माँ एक ही  और एक ही बार मिलती हैं जिनके पास नहीं होती उनसे पूछो असली दर्द  मैं ज्यादा जाता पता नहीं की कितना प्यार करता हूँ उन्हें लेकिन करात बहुत हु

  1. माँ पर कविता Poem on Mother in Hindi

प्यारी जग से न्यारी माँ खुशियाँ देती सारी माँ चलना हमें सिखाती माँ

मंजिल हमें दिखाती माँ सबसे मीठा बोल है माँ दुनिया में अनमोल है माँ

ने हमें खिलाती है माँ लोरी गाकर सुलाती है माँ प्यारी जग से न्यारी माँ

खुशियाँ देती सारी माँ!!

  1. एक माँ Poem on Mother in Hindi

लबो पे उसके कभी बदुआ नहीं होती  बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती  इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो  हैं  माँ बहुत गुस्से में होती हैं तो रो देती हैं 

मैंने रोते  हुए पोछे थे किसी दिन आँशु  मुदत्तों  ने नहीं धोया दुपटा अपना  अभी जिन्दा है माँ मेरी  मुझे कुछ भी नहीं होगा  मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ  चलती है

जभी कस्ती मेरी सैलाब में आजाती है माँ दुआ करती हुइ खवाब में आजाती हैं  अँधेरे देख ले मुँह तेरा कला हो गया  माँ ने आँखे खोलदी घर में उजाला हो गया 

मेरी ख्वाइस है की मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं  माँ से इस तरह लिपटु की फिर से पचा हो जाऊं  माँ के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोना 

जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती  लबो पे उसके कभी बदुआ नहीं होती बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती।

The above poem on Mother in Hindi is very interesting and lovely you can share with your friends and family then they can make their mother happy. These poems are very emotional you can share with your mom on their birthday and also on Mother’s Day

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