If you are searching for Hindi Diwas poem then you are at the right place. Here I’m sharing with you the best 15 Hindi Diwas Poem in Hindi which is really amazing and unique I’m sure you will like it share it with your friends and family.

  1. ईश प्रार्थना Hindi Diwas poem

हे प्रभु जग के तुम्हीं रचयिता तुम्हीं हो पालनहार, तुझसे श्रेष्ठ कोई जग में तुम ही हो आधार हम सबको प्रभु शक्ति देना करें विश्व कल्याण, ऐसा कुछ कर जाएँ जग में अमर हो अपना नाम

दुःखदारिद्र मिटे दुनिया से सबका हो कल्याण, कोई कष्ट हो उस भजन को जो ले तेरा नाम तेरी महिमा विश्वविदित है वेदपुराण बखान, मेरी भी कुछ सुधि लेना प्रभु बारंबार प्रणाम

सारे जग में आज मची है धनवैभव की होड़, कोई अपना अब लगता है कैसा है यह मोड़। विनती है प्रभु केवल तुमसे ; ले फिर से अवतार, तू ही केवल है जो जग का कर सकता उद्धार

  1. हिन्दी हिन्दुस्तान Hindi Diwas poem

जगतगुरू जो रहा युगों तक हिन्दुस्तान महान है, हिन्दी हो जनजन की भाषा यही हमारी शान है।

राष्ट्रभक्त है वही जो हरदम हिन्दी का सम्मान करे, जब तक प्राण रहे इस तन में देश का गौरवगान करे

चाहे कहीं भी जाएँ जग में हिन्दी हमारी बोली हो, विजय पताका फहर उठे जहाँ हिन्द देश की टोली हो

जग के आडंबर से बचना निजगौरव का ध्यान रहे, हिन्दी का अपमान हो हरदम इसका सम्मान रहे

देश में खुशहाली लाने को हिन्दी सबकी भाषा हो, सभी काम हिन्दी में होंगे ऐसी सबको आशा हो।

जननी जन्म देती है सबको भाषा देती बोली है, मातृभूमि आश्रय देती है ज्ञान से भरती झोली है।

विश्व में कितने देश हैं सबकी भाषा ही पहचान है, गर्व से कहते भारतवासी हिन्दी पर अभिमान है।

है नकली हिन्दुस्तानी वह जो हिन्दी का अपमान करे, अपनी मातृभाषा को तज कर अंग्रेजी का गुणगान करें।

आज हमारी हिन्दी की दुर्दशा जनों ने कर दी है, गैरों ने अपनाया इसको अपनों ने ठुकरा दी है।

हिन्दी बोलना लोग मानते सभ्य जनों का काम नहीं, जो हिन्दी बोले उस जन का है समाज में मान नहीं

इतनी विषम परिस्थितियाँ हैं इन सबसे टकराना है, चाहे कुछ भी हो जाए हिन्दी का मान बढ़ाना है

3.आखिरी जंग Hindi Diwas poem

हम सपूत भारत माता के देश की शान बढ़ाएँगे। अपने दम पर दुश्मन को हम क्षण में मार गिराएंगे

मातृभूमि हमें प्राण से प्यारा हम सब इसे सँवारेंगे। चाहे कुछ भी हो जाए पर अब हम इसे बाटेंगे।

इस धरती पर जन्म लिया है इस पर ही हम बड़े हुए जो भी सुख भोगा जीवन में इसके दम पर खड़े हुए।

मेरी रगरग में जो बहुत रक्त वो भारत माता का है। मेरा रोमरोम है कहता

जीवन भाग्यविधाता का है। अलगअलग हैं धर्म हमारे

अलग हमारी जाति है। लेकिन हम सब मिलकर हीं माँ की रूप सुहाती है।

हिंदूमुस्लिम ; सिक्खईसाई बौद्धजैन सब भाईभाई। आपस में हम नहीं लड़ेंगे हम आपके हैं कसमें खाई।

हमें लड़ाता है जो कोई वही हमारा दुश्मन है। उसको मार गिरायेंगे हम जिसका हमसे अनबन है।

सीमा पर दुश्मन जो करता वह तो एक ठिठाई है। बारम्बार जो मात ही खाता छल से करता लड़ाई है।

माँ का दूध पीया है तो फिर छिपकर तुम क्यों लड़ते हो। है हिम्मत तो सामने आओ दुविधा में क्यों पड़ते हैं।

रंग बदल लेने से केवल सियार नहीं पूजा जाता। आडम्बर से नहीं किसी का विजय पताका फहराया।

चाहे कुछ भी हो जाए पर कश्मीर नहीं देंगे इतिहास तुम्हारा जो भी हो पर भूगोल बदल देंगे

  1. बचपन Hindi Diwas poem

बचपन तुम फिर से जाना, मधुरमधुर यादों को लाना, गम से है छुटकारा पाना, इसीलिए तुम फिर जाना।

नहीं चाहते हीरेमोती, खुशियों की बस जीवन ज्योति, मधुर प्रेम की अमर जो बाती आज भी उसकी याद सताती।

निर्धन या धनवान हूँ जग में, इसका कुछ भी ज्ञान होता, धर्मजाति का बंधन मन में, कभी, कहीं भी बोध होता।

कोई चाहे कुछ भी ले ले, लेकिन बचपन को लौटा दे, जीवन का हर कोनाकोना, बचपन की खुशियों सा होना।

5.जीवन धारा Hindi Diwas poem

यह जीवन कितना प्यारा है जो सब जीवों को प्यारा है यह है सबसे अनमोल रतन इसे नहीं तौल सकता है धन

जीवन में सुखदुख आते हैं पर दुख से सब घबराते हैं जीवन नदिया की धारा है सुखदुख का ही किनारा है।

जीवन तो एक अनंत सफर जो सदियों चलता रहता है यह खत्म नहीं होता मरकर बस,तन ही बदलता रहता है।

जीवन को हँसकर जीना है अमृत या विष इसे पीना है यह जीवन है संघर्ष भरा वह सफल हुआ जो नहीं डरा

जीवन से प्यार वो करते हैं जो हरदम हँसते रहते हैं दुख नहीं गाता है उनको काँटों पर पलते हैं जिनको।

मानव जीवन सबसे सुंदर कोई अन्य नहीं इससे बढ़कर यह बारबार नहीं मिलता है सत्कर्म से ही यह खिलता है।

सच है कि यह तन नश्वर हैं इसको तजना पर दुष्कर है वही त्याग सकता है इसको आत्मज्ञान भरपूर है जिसको

इस तन का मूल्य अभी तक है जब तक कि इसमें जीवन है जीवन है प्रभु का दिया हुआ नहीं है अपना कुछ किया हुआ।

जीवन को जान सकोगे तुम ईश्वर को मान सकोगे तुम गीता से पहले ज्ञान करो फिर श्री कृष्ण का ध्यान करो।

जीवन कभी भी रुकता है यह नहीं कभी भी डूबता है यह नहीं समय से बँधा हुआ है यह त्रिकाल से सधा हुआ

हर जीव में जीवन धारा है जो नहीं कभी भी हारा है जीवन नश्वर है अनंत यह जान चुका है दिग दिगंत

  1. सत्यअहिंसा Hindi Diwas poem

हम मानव इस जग के सारे, एक पिता की हैं संतान अलगअलग हैं पंथ हमारे, लेकिन अलग नहीं भगवान

देश अलग है,वेश अलग है, अलग रूप रंग हमारे धर्म अलग है , जाति अलग है, लेकिन अलग नहीं हम सारे.

मजहब की दीवार को तोड़ो, जातिधर्म का बंधन छोड़ो। दिल से दिल का नाता जोड़ो, दयाप्रेम से मुंह मत मोड़ो.

कोई धर्म ऐसा जग में, जो नफरत का पाठ पढ़ाता। धर्म हमेशा ही जनजन को, जीने का है अर्थ बताइए।

धरती एक एक है अंबर, एक ही सबका है पैगंबर जल, मिट्टी हवा एक है, एक ईश पर पथ अनेक है

आओ सब मिल इस दुनिया को, आज प्रेम का पाठ पढ़ा दें धधक रही इस दुनिया को, सत्यअहिंसा अभी सिखा दें

  1. निर्भय मानव Hindi Diwas poem

निर्भय मानव बनकर जग में, अच्छेअच्छे काम करो बाधाएँ जो आवे पथ में, हँसतेहँसते पार करो।

मानव जीवन दुर्लभ है जो, बारबार नहीं मिलता है। तरु से पत्ता गिर जाता जो, पुनः उससे जुड़ता है।

जीवन स्वप्न नहीं है मानो, ईश्वर अंश इसे तुम जानो। व्यर्थ क्यों मानव फिर डरता है, जीवन कभी नहीं मरता है।

ईश्वर में तुम ध्यान लगाओ, डर से मन को दूर भगाओ। मनोयोग से कर्म जो करता, क्या होगा यह सोच डरता

जग में नाम उसी का होता, भाग्य के नाम जो कभी रोता कर्मठता से भाग्य बदलता, हरदम ऊँचे ही पर चढ़ता

  1. चंचल मन Hindi Diwas poem

कितना चंचल मन हम सबका, हर क्षण चलता रहता है। कभी थकता, कभी रुकता, पल में दिशा बदलता है।

थक कर सो जाते हैं हम सब, पर मन कभी सोता है। समझ आया कभी किसी को, आखिर मन क्या होता है।

सचमुच मन है एक सवारी, सबसे तेज जो चलता है। इसपर बैठो तो पल भर में दुनिया घूमा जाता है।

सब कहते हैं मन मक्खी है, गंदा इसको भाता है। पर बुद्धि से चतुर जो मानव इसको वश में रखता है।

पर मन को वश में रखना, नहीं सभी को आता है यदि ऐसा हो जाए तो , खुशियाँ ही बस आता है

मन को वश में रखना सीखो गीता का है सार यही ऐसा कर सकता जो कोई जीतेगा संसार वही

  1. भ्रष्टाचार Hindi Diwas poem

सारे जग में अपना भारत सचमुच बड़ा महान है, जनता की तो बात ही क्या सब नेता ही बेईमान है।

झूठ बोलकर वोट माँगना नेताओं का काम है, सचमुच में भारत अपना भ्रष्टाचार का धाम है।

थाना, दफ्तर, सचिवालय की मत पूछो क्या बात है, स्कूल, कॉलेज,बैंक में भी होता गड़बड़ दिनरात है।

नेता, अफसर, क्लर्क, किरानी ये सब घूस के आदि हैं, कुछ पहने हैं सूटबूट कुछ झार के बैठे खादी हैं।

जन सेवा का जाप ही जपता करता अपना काम है, इसीलिए तो कहते भारत भ्रष्टाचार का धाम है।

देश का सारा नेता अफसर होता मालामाल है, लेकिन देश की भोली जनता रह जाती कंगाल है।

जनता के पैसे का तो हो जाता बंदरबाँट है, इससे ही तो नेताओं का देखो कैसा ठाठ है।

देश की आधी जनता सब दिन भूखे पेट ही सोती है, अपनी किस्मत पर मानो भारतमाता भी रोती है।

छोटा सा भी काम पड़े तो घूस की बात ही होती है, बिना घूस के काम होता जनता किस्मत पर रोती है।

शर्म करो नेता अफसर क्यों झूठी कसमें खाते हो जरा सोचकर बोलो तो क्यों इतनी जुल्में ढाते हो

भ्रष्टाचार के दंश से देखो इक दिन ऐसा आएगा, जनता जाग उठेगी जिस दिन तुम सब ही जल जाएगा

  1. अनोखा लोकतंत्र Hindi Diwas poem

भारत का यह कैसा अनोखा लोकतंत्र है, कुछ मायनों में यह लगता राजतंत्र है।

भारत की जाने यह कैसी तकदीर है, कुछ राजनीतिक दल तो नेताओं की जागीर है

हम भारतीयों की यह कैसी नादानी है, नेताओं ने राजनीति को बना डाला खानदानी है।

माँ मर जाती तो बेटा बन जाता प्रधानमंत्री है, पति जेल चला जाता तो पत्नी बन जाती मुख्यमंत्री है।

बाप के मर जाने पर बेटी बन जाती उत्तराधिकारी है, शुरू से ही चली रही भारतीय राजनीति की यह बीमारी है

सरकारी सेवा में नौकरी पाने को शिक्षा में डिग्री निर्धारित है, नेता बनने के लिए शिक्षा में डिग्री अबाधित है।

आई०ए०एस अधिकारी अनपढ़ नेताओं की करते चिरौरी हैं, तभी तो दोनों मिलकर करते सरकारी खजाने की चोरी हैं।

बेचारी भोली जनता यह सब टुकुरटुकुर देखते रह जाती है, और इस अनोखे लोकतंत्र पर केवल कुछ आँसू ही बहा पाती है

  1. प्यारी धरती Hindi Diwas poem

नीचे धरती शस्यश्यामला ऊपर नील गगन है। नीचे लहराता है सागर ऊपर बहुत मंद पवन है।

मुक्त गगन में पंछी उड़ते निर्भय पंख पसारे, क्षण में नभ में वे छा जाते विचरण करते सारे।

इनके मन में लोभ नहीं है। पाप नहीं संताप नहीं; जी भरकर उड़ते हैं नभ में सीमा नहीं वे पाते हैं, सारा जग ही उनका है तो जहाँ चाहते जाते हैं।

नील गगन के नीचे धरती कितनी प्यारी लगती है हरियाली का पहन के गहना दुल्हन की तरह जब सजती है।

भाँतिभाँति के जीव धरा पर सब मनमोहक लगते हैं ईश्वर के सब ही प्यारे हैं धर्मग्रंथ सब कहते हैं

  1. झूठ का सौदा Hindi Diwas poem

नेताजी की गाड़ी आई, जनता ने खूब चीख मचाई, सबसे पहले चमचा उतरा, इसके बाद तमाशा पसरा

होहो कर खूब शोर मचाया, नेताजी ने पुलिस बुलाया, क्यों करते हो हल्ला भाई, वर्षों बाद क्यों याद है आई।

ठहरो समझाता हूँ सबको, पहले आगवानी को लपको यह कहके नेताजी उतरे, मंच गए कुरसी पर पसरे।

सोचा क्या जनता से बोलूँ, बिना काम मुँह कैसे खोले हिम्मत करके माइक को पकड़े, जनता पर फिर कसकर आंकड़े।

बोले पहले हाथ उठाओ , वादा करके घर को जाओ वोट हमें दोगे तो बोलो , सच्चाई पर मुझे तौलो

अगर सच मैं तुमसे बोलूँ , बिना मौत मैं मारा जाऊँ मैं केवल वादे करता हूँ, झूठ का ही सौदे करता हूँ

  1. हमारा तिरंगा Hindi Diwas poem

तीन रंग से बना तिरंगा कितना प्यारा लगता है, इसका जोड़ नहीं दुनिया में सबसे न्यारा लगता है।

आसमान में लहराता है दुश्मन को दहलाता है, शान तिरंगा है हम सबका हर भारतवासी कहता है।

तीन रंग हैं इस झंडे में तीनों का पैगाम है। विजय चक्र है कहता सबसे भारत देश महान है।

केसरिया बल भरता सबमें सैनिक बनते शेर हैं। दुश्मन चाहे जितने भी हों क्षण में होते ढेर हैं।

सफेद रंग है हमें सिखाता सत्य की जीत ही होती है, सन्मार्ग पर चलना सीखो जीत तभी तो होती है।

हरा रंग है दर्शाता धरती की छटा निराली है, सबसे सुंदर सबसे अनुपम धरती की हरियाली है।

इस झंडे से बल मिलता है देश के वीर जवानों को, ऊँचा सदा ही रखता है यह वीरों के अरमानों को।

इस झंडे पर मर मिटने की कसमें हम सब खाते हैं, जब तक तन में जीवन है इसकी जय गाथा गाते हैं।

कभी झुकने देंगे इसको चाहे प्राण रहे या जाए, यही तमन्ना है जीवन की इसको हम सब मिल फहराये।

आनबान और शान बना है विजय पताका फहराओ, भारत नहीं किसी से कम है दुनिया को भी बतलाओ

  1. कश्मीर का आतंकवाद Hindi Diwas poem

कश्मीर भारत माता के माथे का मुकुट है। आतंकवाद की समस्या वहाँ विकट है।

वर्षों से आतंकवाद पाँव वहाँ पसारे है, कश्मीरी पंडित वहाँ के मूल निवासी हो गए बेसहारे हैं

दुश्मन कश्मीर पर शुरू से नजरें गड़ाए है, आतंकियों के नाम पर अपनी सेना को भिड़े है

कब तलक झेलेगा भारत आतंकवाद के दंश को, तो है दुश्मन तुला कश्मीर में विध्वंस को।

कहा तो जाता है कि कश्मीर धरती का स्वर्ग है, पर आतंकियों ने तो इसे बना डाला नरक है।

वर्तमान स्थिति पर गौर करना जरूरी है। दुश्मन को हम लगातार सहते रहें ऐसी क्या मजबूरी है।

कोई भी राज्य देश से ऊपर नहीं है, संविधान जनता के हित से ऊपर नहीं है।

आज यह जरूरी है संविधान में बदलाव करो। किसी भी कीमत पर कश्मीर को आतंकवाद से आजाद करो।

कहते हो कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, फिर वहाँ की धरती आज क्यों बदरंग है

कुचल डालो दुश्मन के नापाक इरादों को , भूलो मत जनता से किए गए वादों को

जनता ने आज तुम्हें पूर्ण बहुमत से जिताया है तुम्हीं हो देश के कर्णधार ऐसा सोच गद्दी पर बिठाया है

सोचो मत ; देश और जनता की तकदीर बदल डालो , सही वक्त है यही जब कश्मीर का इतिहास बदल डालो

  1. सुबहशाम Hindi Diwas poem

जिसका नाम जपे हर कोई हर दिन सुबहशाम, जिसके नाम से आता दिल में शांति का पैगाम,

कोई अल्लाह उसे पुकारे कोई कहता राम वाहेगुरु भी कोई कहता सब एक ही का नाम

बोले हर दिन सुबहशाम बोले हर दिन सुबहशाम सूर्यचंद्र में वही छिपा है

हर प्राणी में वही बसा है उससे अलग कोई भी है उसकी नजरें सब पर ही हैं उससे हम कभी छिप नहीं सकते

उन नजरों से बच नहीं सकते देख रहा हरदम वह सबको क्या करते हम काम ले लो दिल से प्रभु का नाम

बोलो अल्ला या श्रीराम बोलो हर दिन सुबहशाम जल में है वह,थल में भी है हवा के कणकण में भी वह है

श्रृष्टि में कोई जगह नहीं है ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसमें प्रभु मौजूद नहीं है उसके नाम से बन जाता है

हर बिगड़ा ही काम ले लो मन से प्रभु का नाम बोलो हरिहरि सुबहशाम बोलो हर दिन सुबहशाम

Thank you for reading these Hindi Diwas Poem I’m sure you would like it and share it. These poems are specially for those who Bharat and Understand how important it is. Bharat is a very special country all over the world.

 

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