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  1. किरणों का जाल Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

उषा ने फेंका रविपाषाण निशाभाजन में; जल्दी जाग, प्रिय, देखो पा यह संकेत गए कैसे तारकदल भाग!

और देखो तो उठकर, प्राण, अहेरी ने पूरब के लाल

फँसा ली सुलतानी मीनार बिछा कैसा किरणों का जाल !

  1. जीवनमदिरा सूख Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

उषा ने ले आँगड़ाई, हाथ दिए जब नभ की ओर पसार, स्वप्न में मदिरालय के बीच सुनी तब मैंने एक पुकार

उठो, मेरे शिशु नादान, बुझा ली पीपी मदिरा भूख,

नहीं तो तनप्याली की शीघ जायगी जीवनमदिरा सूख

  1. खोलो द्वार Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

श्रवण कर अरुणशिखाध्वनि कान उठे यात्री सब साथ पुकार, पड़े थे जो मदिरालय धोरअरे, जल्दी से खोलो द्वार !

नहीं है वया तुमको मालूम खड़ी जीवनतरणी क्षण चार,

बहुत सांभव है जा उस पार फिर यह पाए इस पार

  1. ईसा का उच्छ्वास Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

नई तरुआभा नवल समीर जनाते, आया नूतन वर्ष, जर्जरित इच्छाएँ भी आज पा रहीं यौवन का उत्कर्ष

मनीषी भोग रहे एकांत, एक मधु ऋतु उनके भी पास

ज्वलित कर मूसा का तरुज्योति, समीरण, ईसा का उच्छ्वास

  1. पान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

सभी पाटलपुष्पों के साथ अरसआराम हुआ बर्बाद, रही जमशेदी प्याले सात चक्रवाले की किसको याद ?

मगर अब भी लहराते बार सलिल के कूलों पर छविमान

मगर अब भी मिट्टी का पात्र कराता माणिक मधु का पान

  1. सुरीली तान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

युगों से मौन हुआ दाऊद, कभी था जिसका सुमधुर गान, मगर बुलबुल अब भी स्वर्गीय स्वरों में छेड़ सुरीली तान,

सुना जा पटेल को नित्यसुरा पी, मधु पी मदिरा लाल !”

जिसे पीकर हो जाएँ शीघ्र गुलाबी उसके पीले गाल।

  1. वह आता पर मार Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi 

बसंती ज्वालअग्नि में, आज पिलाकर मधु मदिरा साह्लाद, उड़ा दो अपने करके राख हृदय के पश्चातापविषाद

कालपक्षी के पर दिनरात, उसे परिमित पथ करना पार;

प्रिये, तुम करतीं य्थ विलंब, उड़ा, ली, वह आता पर मार !

  1. अपने साथ Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

कलीकुसुमों के वन के बीच पाँव रखता है ज्याही प्रात, कलीदल खिल उठता अनजान, कुसुमदल झर पड़ता अज्ञात

अरे, आता जो आज वसंत साज पाटल से अपने हाथ,

हमारे कैकुबादजमशेद जाएगा ले कल अपने साथ।

  1. प्रिये Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

सोचकर खुसरो का भाग्य और कर कैकुबाद की याद, जिन्हें संसार गया है भूल, समय केवल करग ब्वाद

बुलाए हातिम देदे भोज, उठाए रुस्तम रण को हाथ;

करके उनकी कुछ परवाह प्रिये, तुम आओ मेरे साथ।

  1. घास Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

चलो, चलकर बैठे उम ठौर, बिछी जिस थल मखमलसी घास, जहाँ जा शस्यश्यामला भूमि धवल मरु के बैठी है पास,

जहाँ कोई किसी का दास, जहाँ कोई किसी का नाथ,

नृपति महमूद सिंह भाग जहाँ यदि हमको देखे साथ

  1. नंदन उद्यान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

धनी सिर पर तरुवर की डाल, हरी पाँवों के नीचे घास, बग़ल में मधु मदिरा का पात्र, सासने रोटी के दो ग्रास,

सरस कविता की पुस्तक हाथ, और सब के ऊपर तुम, प्राण,

गा रहीं छेड़ सुरीली तान, मुझे अब मरु, नंदन उद्यान

  1. ढोल Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

सुना मैंने, कहते कुछ लोग मधुर जग पर मानव का राज ! और कुछ कहतेजग से दूर स्वर्ग में ही सब सुख का साज !

दूर का छोड़ प्रलोभन, मोह, कगे, जो पास डीसी का मोल,

सुहाने भर लगते हैं, प्राण, अरे, दूरदूर के ढोल !

  1. झोली Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

खिली जो अपने चारों ओर, सुनो, क्या कहती पटेलमालहँसहँसकर उपवन के बीच लूटती मोती मैं इस काल

रेशमी झोली अपनी फाड़ अभी इस वन में दूँगी फेंक,

और अपनी निधियां अनमोल लुटा दूंगा मैं क्षण में एक

  1. धूसरित मरु Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

जगत की आशा जाज्वल्य, लगता मानव जिन पर आँख, जाने सब की सब किस ओर, हाय ! उड़ जातीं बनकर राख

किसी की यदि कोई अभिलाष फली भी तो वह कितनी देर ?

धूसरित मरु पर हिमकणराशि चमक पाती है जितनी देर

  1. उखाड़ Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

समेदा जिन, कृपणों ने स्वर्ण, सुरक्षित क्या उसके मूँद, लुटाया, और, जिन्हेंने खूब, लुटाते जैसे बाल बूंद,

गड़े दोनों ही एक समान, हुए मिट्टी दोनों के हाड़,

कोई हो पाया वह स्वर्ण, जिसे देखें फिर लोग उखाड़।

  1. मेहमान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

जीर्ण जाती है एक सराय, दिवानिशि जिसके द्वार विशाल, खोलती एक उषा उठ प्रात, दूसरा, संध्या, सायंकाल।

यहाँ बड़ेबड़े सुल्तान बड़ी थी जिनकी शौकतशान,

जाने कर किस और प्रयापा गए, बस दो दिन रह मेहमान

  1. श्वान लात Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

जहाँ था जमशेदी दरबार, शान से होता था मधुपान, वहाँ स्वच्छंद घूमते सिंह, वहाँ निर्भीक भूकते श्वान

और, वह बादशाह बहराम, अहेरी जो था जयविख्यात,

पड़ा निद्रा में आज अचेत गधे की सिर पर श्वान लात

  1. गोद Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

वही होते अति लाल गुलाब, जड़ें जिनकी कर पातीं पान, मड़े अतनीपतियों का खून; समझ यह, आता मुझको ध्यान,

हाय, वन की हर सुंबुलवेलि, रही जो हिलखिल आज समोद,

किसी सुमुखी की कुंतलराशि, पड़ी जी गिर उपवन की गोद

  1. पौधे अनजान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

अरे, यह कितने कोमल पात, चुंबक से अपने अम्लान, ढक रहे जो सरिता का कूल विचरते हमतुम जिस पर, प्राण !

धीरे धीरे से इस पर पाँव, कौन जाने, हो सकता, प्राण !

किन्हीं मृदु अधरों को ही चुम उगे हों यह पौधे अनजान !

  1. प्यारी मदिरा Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

पिलाकर प्यारी मदिरा आज नशे में इतना कर दो चूर, भविष्य के भय जाएँ भाग, भूत के दारुण दुख हों दूर।

प्रिये, लेना मत कल का नाम, नहीं कल पर मुझको विशवास,

अरे, कल दूर, एक क्षण बाद काल का मैं हो सकता ग्रास

  1. अरमानों की भूख Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

अरे, वे सुंदरता, वे श्रेष्ठ, जिन्हें हम करते इतना प्यार, क्रूरकटु कालकर्म के, हाय, हो गए कितने शीघ्र शिकार !

पी पाए प्याले चार, गया उनका जीवनमधु सूख,

चले करने विश्राम अनंत, लिए निज अरमानों की भूख

  1. रंग रेल मचाने Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

उन्होंने छोड़ा जो उद्यान, हमारा वह आनंदनिवास, वहाँ सज प्रकृति वसंती साज हृदय में भर्ती हासहुलास।

करें उन पर रंगरेली आज, जहाँ वे, पर, जाना उस ठौर;

हमारे ऊपर भी रंग रेल मचाने को आएंगे और

  1. शेष Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

अरे, अब भी जो कुछ है शेष, भोग वह सकते हम स्वच्छंद, राख में मिल जाने के पूर्व क्यों कर लें जी भर आनंद;

गड़ेंगे जब हम होकर राख राख में, तब पिर कहाँ चसंत,

कहाँ स्वरकार, सुरा, संगीत, कहाँ इस सूनेपन का अंत !

  1. रे मानव नादान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

भोगने को होते तैयार बहुत से वर्तमान संसर, पहुँचने को आगामी स्वर्ग बहुत सहते कष्ट अपार;

अँधेरे की चढ़कर मीनार मुअज्ज़िन यह करता आह्वान

रहेगा दोनों ओर निराश, “भटक मत, रे मानव नादान!

  1. स्वर्गजग Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

स्वर्गजग पर करते शास्त्रार्थ जता विद्वता का अभिमान, अरे, कल जो सब पंडितविज्ञ, गड़े मूढ़ों के आसमान

कुचल दी जाने को सब ओर गई दी उनकी वाणी छीट,

बंद करने को मुख वाचाल गई दी मिट्टी उन्हें पीट

  1. प्रिये Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

प्रिये, बैठ मेरे पास, सुनो मत क्या कहते विद्वान, यहाँ निश्चित केवल यह बात कि होता जीवन का अवसान

यहाँ निश्चित केवल यह बात, और सब झूठ और निर्मूल;

सुमन जो आज गया है सूख, सकेया वह कभी फिर फूल

  1. प्रस्थान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

पांडितोंविद्वानों के पास गया यौवन में बार अनेक स्वयं मैं उत्सुकता के साथ समझने उनका तर्कविवेक

युक्तियाँ भूलभुलैया एक लगी, जिसमें हिरफिर कर, प्राण,

उसी ड्योदी के पहुँचा पास, किया था जिस पर से प्रस्थान

  1. छोड़ा जाता हूँ उच्छ्वास Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

ज्ञानियों को ले अपने साथ ज्ञान के मैंने बोए बीज, उगाने का करते श्रमयत्न उठा मेरा तनप्राण पसीज;

और, इस खेती के फलरूप यही कहने को मेरे पास

लिये आता था अश्रुप्रवाह, “छोड़ा जाता हूँ उच्छ्वास

  1. पवमान महान Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

अरे, आया क्यों जग के बीच ! कहाँ से तृणसा मुझको तोड़, बहा लाई है कोई धार, लाई जो गुजरातीतट पर छोड़ ?

जरात क्यों देना होगा छोड़ ? कहाँ को, रजकण मुझको जान,

उड़ा ले जाएगा दिन एक किसी मरु का पवमान महान ?

  1. अन्यायी की याद Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi

पूछा, फेंक दिया इस ओर, हमें समझा इतना निरुपाय ! पूछा, खींच लिया उस ओर, बड़ा यह तो हम पर न्याय !

प्रिये, प्याले पर प्याला ढाल बढ़ा दो इतना मदउन्माद,

जाए जन्मनिधन पर ध्यान, आए अन्यायी की याद !

Thank you for reading Harivansh Rai Bachchan poem in Hindi. My main motive for sharing these poems is to tell people how they write their poems I’m you would like it and you will share Harivansh Rai Bachchan’s poems.

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